मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद विवाद की मुख्य याचिका तय करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम टिप्पणी की है. सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि वह इस विवाद को वापस इलाहाबाद हाई कोर्ट वापस भेजेगा. हाई कोर्ट सभी पक्षों को सुन कर तय करेगा कि मामले में भगवान श्रीकृष्ण के भक्तों का प्रतिनिधित्व कौन करेगा.
क्या है मामला?
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मामले में एक मुकदमे को प्रतिनिधि वाद यानी रिप्रेजेंटेटिव सूट घोषित कर दिया है. इसका बाकी याचिकाकर्ता विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि उन्होंने कई वर्षों तक मामले में कानूनी लड़ाई लड़ी है. अचानक किसी नई याचिका को प्रतिनिधि वाद घोषित कर देना गलत है. हर याचिका में अलग-अलग कानूनी दलील दी गई है. ऐसे में बाकियों की उपेक्षा कर किसी एक याचिका को सुनना सही नहीं होगा.
कुल कितने मुकदमे?
श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद से जुड़े 18 मुकदमे इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित हैं. सूट नंबर 1 मामले का लीडिंग केस था, जो 15 मुकदमों को एक साथ जोड़ते हुए उसे यह दर्जा दिया गया था. लेकिन पिछले साल जुलाई में हाई कोर्ट ने इनमें से सूट नंबर 17 को भगवान श्रीकृष्ण के सभी भक्तों का प्रतिनिधित्व करने की अनुमति दे दी.
सूट 1 और 17 की लड़ाई
वाद संख्या 17 को भगवान श्रीकृष्ण विराजमान की ओर से बतौर ‘नेक्स्ट फ्रेंड’ सुरेंद्र कुमार गुप्ता, महाबीर शर्मा और प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने दाखिल किया है. वाद संख्या 1 भी भगवान श्रीकृष्ण विराजमान की ओर से दाखिल है. इसमें नेक्स्ट फ्रेंड के तौर पर रंजना अग्निहोत्री, प्रवेश कुमार, राजेश मणि त्रिपाठी, करुणेश कुमार शुक्ला, शिवाजी सिंह और त्रिपुरापुरी तिवारी हैं. सूट 1 के वादी सूट 17 को रिप्रेजेंटेटिव सूट बनाने का विरोध कर रहे हैं.
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच ने सुनवाई के दौरान इस बात को नोट किया कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सभी वादियों को नोटिस जारी किए बिना ही तय कर दिया कि भक्तों का प्रतिनिधित्व कौन करेगा. जजों ने माना कि हाई कोर्ट के सामने दायर आवेदन किसी और विषय पर था, लेकिन फैसला किसी दूसरे मुद्दे पर सुना दिया गया. जजों ने पूछा कि क्या वादियों के बीच कोई समझौता हो रहा है. सूट नंबर 1 के लिए पेश वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है.
2 सप्ताह बाद सुनवाई
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई 2 सप्ताह के लिए स्थगित कर दी. कोर्ट ने कहा कि इस तरह का आदेश देने से पहले सभी पक्षों को नोटिस जारी होना चाहिए था. जजों ने संकेत दिया कि उचित प्रक्रिया का पालन करने और सभी पक्षों को सुनने के लिए इस विवाद को वापस इलाहाबाद हाई कोर्ट भेजा जाएगा. हाईन्यूज़ !














