बांग्लादेश में जनमत संग्रह (रेफरेंडम) के फैसले को लेकर सियासी विवाद गहरा गया है. विपक्ष के नेता और बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी अमीर के शफीकुर रहमान ने शनिवार को प्रधानमंत्री तारिक रहमान पर चुनाव से पहले किए गए वादों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाया. उन्होंने सरकार से जनता से किए गए सभी वादों को निभाने और जनमत संग्रह के फैसले को तत्काल लागू करने की मांग की. यह बयान रंगपुर जिला स्कूल मैदान में 11 दलों के गठबंधन की रैली के दौरान दिया गया.
‘जनता से किया वादा निभाइए, राष्ट्र से विश्वासघात मत कीजिए’
शफीकुर रहमान ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान चुनाव से पहले उनकी पार्टी का समर्थन करने और जनमत संग्रह के फैसले को लागू करने का वादा किया था, लेकिन उन्होंने केवल पहला वादा निभाया. उन्होंने सरकार से कहा, ‘राष्ट्र से विश्वासघात मत कीजिए. जनता से किए गए वादे पूरे कीजिए और जनमत संग्रह के फैसले को लागू कीजिए.’
11 दलों की रैली में उठीं कई अहम मांगें
रंगपुर में आयोजित इस रैली में 11 दलों के गठबंधन ने कई प्रमुख मुद्दे उठाए. इनमें तीस्ता मास्टर प्लान को लागू करने, जनमत संग्रह के फैसले को अमल में लाने, सीमा पर होने वाली हत्याओं और कथित ‘पुश-इन’ की घटनाओं को रोकने तथा आम लोगों की परेशानियां कम करने की मांग शामिल रही.
‘जनमत संग्रह के मुद्दे से लोगों का ध्यान भटकाया जा रहा’
शफीकुर रहमान ने आरोप लगाया कि सरकार और अन्य ताकतें अलग-अलग तरीकों से लोगों का ध्यान जनमत संग्रह के फैसले को लागू करने की मांग से हटाने की कोशिश कर रही हैं. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इस मुद्दे से पीछे नहीं हटेगी और जनता से किया गया वादा हर हाल में पूरा कराने के लिए संघर्ष जारी रखेगी.
उन्होंने कहा, ‘हम अपने इस रुख से एक इंच भी पीछे नहीं हटेंगे. रंगपुर की इस धरती से मैं फिर दोहराता हूं कि हम जनमत संग्रह के फैसले को लागू कराने के लिए अपना आंदोलन जारी रखेंगे.’
युवाओं के संघर्ष और सुधारों का किया जिक्र
उन्होंने कहा कि देश के युवाओं ने असमानता और भ्रष्ट राजनीति के खिलाफ संघर्ष कर एक नए बांग्लादेश के निर्माण का सपना देखा था. उनके अनुसार, जनमत संग्रह का उद्देश्य भी देश में जरूरी सुधारों को लागू करना था और सरकार को उस जनादेश का सम्मान करना चाहिए.
तीस्ता परियोजना पर भी सरकार को घेरा
तीस्ता परियोजना को लेकर भी शफीकुर रहमान ने सरकार की आलोचना की. उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले सत्तारूढ़ दल ने ‘जागो बाहे, तीस्ता बचाओ’ आंदोलन चलाया था, लेकिन मौजूदा बजट में तीस्ता परियोजना के लिए कोई धन आवंटित नहीं किया गया.
उन्होंने कहा, ‘हमें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर काम चाहिए. यदि मौजूदा सरकार यह परियोजना लागू नहीं कर पाती, तो भविष्य में जनता के समर्थन से 11 दलों का गठबंधन सरकार बनाकर तीस्ता परियोजना को पूरा करेगा.’
सीमा विवाद और भारत पर भी लगाए आरोप
शफीकुर रहमान ने आरोप लगाया कि भारत सीमा पर तनाव पैदा कर रहा है, जबकि सरकार इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए है. उन्होंने कहा कि आम लोग सीमा सुरक्षा बल (BGB) के जवानों के साथ खड़े होकर ऐसी घटनाओं का विरोध कर रहे हैं और उनकी बहादुरी सराहनीय है. उन्होंने सरकार से अपील की कि वह किसी और को खुश करने के बजाय देश की जनता की भावनाओं के अनुरूप कदम उठाए.
गठबंधन के अन्य नेताओं ने भी रखे विचार
रैली की अध्यक्षता विपक्ष के मुख्य सचेतक और एनसीपी (NCP) के संयोजक नाहिद इस्लाम ने की. इस दौरान गठबंधन में शामिल विभिन्न दलों के नेताओं ने भी सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए जनमत संग्रह के फैसले और तीस्ता परियोजना को जल्द लागू करने की मांग दोहराई. हाईन्यूज़ !














