वायनाड में सुरंग परियोजना स्थल पर हुए भूस्खलन में छह लोगों की मौत ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब सामने आई एक आंतरिक रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि हादसे का खतरा पहले ही जताया जा चुका था. रिपोर्ट में साफ चेतावनी दी गई थी कि भारी बारिश के बीच सुरंग के उत्तरी छोर की ढलान कभी भी ध्वस्त हो सकती है. इसके बावजूद कई जरूरी सुरक्षा उपाय समय पर पूरे नहीं किए गए.
11 जून की रिपोर्ट में दर्ज था भूस्खलन का खतरा
सुरंग निर्माण का काम देख रही सब-कॉन्ट्रैक्टर कंपनी दिलीप बिल्डकॉन लिमिटेड (DBL) ने 3 से 11 जून के बीच स्थल का भू-वैज्ञानिक और तकनीकी सर्वे कराया था. एनडीटीवी की रिपोर्ट पर कंपनी के वरिष्ठ भू-वैज्ञानिक, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) के अधिकारी और प्रोजेक्ट के अथॉरिटी इंजीनियर के हस्ताक्षर हैं.
रिपोर्ट में बताया गया कि सुरंग के उत्तरी प्रवेश द्वार (नॉर्थ पोर्टल) के ऊपर लगभग 35 मीटर मोटी ढीली और सिल्टयुक्त मिट्टी की परत है. भारी बारिश के दौरान यह मिट्टी पानी सोखकर और कमजोर हो जाती है, जिससे भूस्खलन का खतरा तेजी से बढ़ जाता है.
दरारें, पानी का रिसाव और जमीन के अंदर बहता पानी मिला
निरीक्षण के दौरान इंजीनियरों ने ढलान पर कई जगह चौड़ी होती दरारें, मिट्टी का धंसना, कीचड़ वाला पानी रिसता हुआ और मिट्टी के भीतर खाली जगह बनती हुई देखी. सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि इंजीनियरों को जमीन के अंदर पानी बहने की आवाज सुनाई दी. रिपोर्ट में चेतावनी दी गई कि अंदरूनी कटाव किसी भी समय पूरी ढलान को अचानक गिरा सकता है. रिपोर्ट में विशेष रूप से कहा गया कि बाईं ओर की ढलान सबसे ज्यादा जोखिम में है और लगातार बारिश के बीच “किसी भी समय अचानक ढह सकती है.”
सुरक्षा इंतजाम भी अधूरे मिले
रिपोर्ट के मुताबिक, पानी निकालने के लिए बनाए गए ड्रेनेज होल ठीक से काम नहीं कर रहे थे. भूजल दबाव मापने वाले उपकरण (पाइजोमीटर) भी अभी तक लगाए नहीं गए थे. मौके पर मौजूद निगरानी प्रणाली भी वास्तविक खतरे को सही तरीके से दर्ज नहीं कर पा रही थी.
चेतावनी के बावजूद हुई ब्लास्टिंग
रिपोर्ट के अनुसार 5, 6 और 11 जून को ट्रायल ब्लास्टिंग भी की गई. हालांकि रिपोर्ट में कहा गया कि कंपन सुरक्षित सीमा के भीतर था और ढलान कमजोर होने की मुख्य वजह भारी बारिश थी, ब्लास्टिंग नहीं.
रिपोर्ट में सुझाए गए थे कई सुरक्षा उपाय
विशेषज्ञों ने ढलान को सहारा देने के लिए गेबियन वॉल, पूरी ढलान पर तिरपाल बिछाने, बारिश का पानी सुरक्षित निकालने के लिए पक्की नालियां बनाने, मिट्टी की मजबूती की दोबारा जांच करने और ढलान के पास बने कंक्रीट मिक्सिंग प्लांट को दूसरी जगह शिफ्ट करने की सिफारिश की थी.
कंपनी का दावा- रिपोर्ट के बाद काम रोक दिया था
कोंकण रेलवे से जुड़े एक इंजीनियर ने दावा किया कि रिपोर्ट मिलने के बाद नॉर्थ पोर्टल पर काम रोक दिया गया था. उनका कहना है कि शॉटक्रीट के साथ 12 मीटर लंबे कंक्रीट रॉड भी लगाए गए थे, लेकिन पहाड़ी के ऊपर हुए बड़े भूस्खलन को कोई सुरक्षा उपाय रोक नहीं सकता था. हालांकि अधिकारी यह स्पष्ट जवाब नहीं दे सके कि गेबियन वॉल जैसी संरचनाएं समय पर क्यों नहीं बनाई गईं और मानसून को देखते हुए पर्याप्त तैयारी क्यों नहीं की गई.
मिट्टी रखने के लिए जमीन नहीं मिली: ठेकेदार
ठेकेदार ने यह भी दावा किया कि खुदाई से निकली मिट्टी रखने के लिए सरकार ने समय पर जमीन उपलब्ध नहीं कराई. हादसे के बाद दक्षिणी पोर्टल पर काम कर रहे करीब 200 मजदूर डर के कारण अपने घर लौट गए हैं. कंपनी का कहना है कि विशेषज्ञ समिति की मंजूरी मिलने के बाद ही आगे का काम शुरू किया जाएगा. रिपोर्ट से साफ संकेत मिलता है कि हादसे की आशंका पहले ही जताई जा चुकी थी. बताया गया कि कंपनी ने जिला कलेक्टर के 20 जून के कार्य रोकने के आदेश से करीब छह दिन पहले ही इस खतरे को देखते हुए काम रोक दिया था और मानसून गुजरने का इंतजार कर रही थी. हाईन्यूज़ !














