अमेरिका-ईरान के बीच फिर भड़की जंग! कुवैत से बहरीन तक तबाही, क्यों टूटा सीजफायर?

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है. दोनों देश एक-दूसरे पर ताबड़तोड़ हमले कर रहे हैं. हालांकि यह सैन्य ताकत का प्रदर्शन बातचीत में बढ़त हासिल करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है. इसे अंतरराष्ट्रीय राजनीति की भाषा में Coercive Diplomacy और Brinkmanship का मिश्रण माना जाता है. अमेरिका ने हाल ही में ईरान के आठ ठिकानों पर अटैक किया. जबकि ईरान ने करारा जवाब देते हुए बहरीन और कुवैत पर हमला कर दिया. अमेरिका-ईरान युद्ध की वजह से दुनिया के तमाम देश प्रभावित हो रहे हैं और इसका असर भी दिखने लगा है.

क्या ताकत दिखाकर बात मनवाने की कोशिश हो रही

दोनों देश बातचीत की मेज पर कमजोर नहीं दिखना चाहते, इसलिए समय-समय पर सैन्य कार्रवाई और एक-दूसरे के खिलाफ सख्त बयान देकर अपने विरोधी पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं. ट्रंप चाहते हैं कि ईरान परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह रोककर उनकी बात मान ले, जबकि ईरान अब अपनी जिद पर अड़ गया है.

बाजार में उतार-चढ़ाव और राजनीतिक फायदा

अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने पर तेल और शेयर बाजारों में तुरंत असर दिखाई देता है. बड़े राजनीतिक घटनाक्रमों का बाजार की दिशा पर भी प्रभाव पड़ता है. हालांकि यूएस-ईरान युद्ध सिर्फ बाजार को प्रभावित करने के लिए नहीं हो रहा.

क्या ट्रंप पर इजरायल का है दबाव?

इजरायल लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को अपनी सुरक्षा के लिए खतरा बताता रहा है. इसलिए अमेरिका की ईरान नीति पर इजराइल की चिंताओं का असर होना स्वाभाविक माना जाता है. हालांकि अमेरिका अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर फैसले लेने की बात करता है, लेकिन दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी बेहद मजबूत है.

क्या ईरान तेल की कीमतें नीचे नहीं जाने देना चाहता?

ईरान की अर्थव्यवस्था काफी हद तक तेल निर्यात से जुड़ी हुई है. ऐसे में तेल की ऊंची कीमतें उसके लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद हो सकती हैं. हालांकि वैश्विक तेल बाजार केवल ईरान से नहीं, बल्कि कई देशों की सप्लाई और मांग से प्रभावित होता है.

बातचीत और दबाव की रणनीति

अमेरिका और ईरान के बीच कई बार ऐसा देखा गया है कि बातचीत जारी रहते हुए भी तनावपूर्ण घटनाएं सामने आती हैं. इसका मकसद अपने पक्ष को मजबूत दिखाना और दूसरे पक्ष को ज्यादा रियायतें देने के लिए मजबूर करना हो सकता है. दोनों देश यह भी चाहते हैं कि बातचीत के दौरान उनकी घरेलू राजनीति में कमजोरी का मैसेज न जाए.

हॉर्मुज और यूरेनियम पर टकराव

ईरान स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को अपनी रणनीतिक ताकत के रूप में देखता है. दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी रास्ते से गुजरता है, इसलिए इसका महत्व बहुत ज्यादा है. दूसरी ओर अमेरिका और उसके सहयोगी नहीं चाहते कि इस क्षेत्र पर किसी एक देश का ज्यादा प्रभाव हो. साथ ही ईरान के यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को लेकर भी लंबे समय से विवाद बना हुआ है.

घरेलू राजनीति का भी असर?

अमेरिका में चुनावी माहौल के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे अक्सर प्रमुखता से सामने आते हैं. ऐसे समय में किसी भी राष्ट्रपति के लिए मजबूत नेतृत्व की छवि दिखाना राजनीतिक रूप से फायदेमंद माना जाता है. कुछ विश्लेषकों का मानना है कि शांति और शक्ति, दोनों की छवि साथ-साथ बनाने की कोशिश भी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हो सकती है. हाईन्यूज़ !

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