देश में आजादी के बाद से दलितों के अधिकारों और उनके उत्थान की बड़ी-बड़ी बातें हुई, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी हैरान करने वाली है. जहां दलितों के अधिकारों का हनन ही नहीं हो रहा, बल्कि उन्हें अपने तरह से जीवन जीने या अपने तरह से शादी करने तक का अधिकार नहीं है. यदि वो ऐसा कोई कदम उठाते है तो उन्हें दबंगों की दबंगई का शिकार होना पड़ता है और पिटना तक पड़ता है.
दलित दूल्हे को घोड़ी पर बैठना पड़ा महंगा
मध्य प्रदेश के दमोह जिले से कुछ ऐसी ही खबर है, जहां एक दलित दूल्हे को घोड़ी पर बैठना महंगा पड़ गया. दबंगों ने जब दलित युवक को घोड़ी पर बैठा देखा तो उसे नीचे पटक दिया, उसके और उसकी बहन के साथ बेरहमी के साथ मारपीट की और जिस दूल्हे की बारात जानी थी, वो दूल्हा पुलिस थाने और अस्पताल में जा पहुंचा. ये सनसनीखेज मामला दमोह जिले के हटा थाना क्षेत्र के तहत आने वाले बिजोरी पाठक गांव से सामने आया है.
घोड़ी पर बैठने पर लोधी समाज के लोगों ने पीटा
मंगलवार (21 अप्रैल) की शाम दलित वर्ग के युवक गोलू अहीरवाल की बारात छतरपुर जिले के बक्सवाहा जाना थी. मगर बारात को रवानगी ले जाने से पहले दूल्हे को घोड़ी पर बैठाकर गांव में घुमाया जा रहा था, जिसे स्थानीय भाषा में रछवाई प्रथा कहा जाता है. दूल्हा गोलू घोड़ी पर सवार था. महिलाएं और बच्चों के साथ परिवार वाले खुशियां मना रहे थे और नाच रहे थे. मगर जैसे ही इस गांव के लोधी मोहल्ले में ये दलित दूल्हा पहुंचा तो वहां बवाल खड़ा हो गया.
इस मोहल्ले में रहने वाले ऊंची जाति के कुछ लोगों ने आपत्ति की. रूढ़िवादी परम्परा का हवाला देकर दलित दूल्हे को घोड़ी पर बैठने की इजाजत न होने की बात कही और फिर इन दबंगों ने मारपीट शुरू कर दी. दबंगों ने दूल्हे को नीचे पटका और उसके साथ मारपीट करने लगे. वहीं दूल्हे की बहन को भी नहीं बख्शा गया और भाई-बहन दोनों को जमकर पीटा.
पीड़ितों ने SC/ST Act के तहत मामला किया दर्ज
इस घटनाक्रम के बाद पूरी बारात हटा पुलिस थाने पहुंची, जहां पीड़ितों ने रिपोर्ट दर्ज कराई. दलित दूल्हा गोलू और उसकी बहन को कई जगह चोटें आई है, जिन्हें हटाकर सिविल अस्पताल भेजा गया और इलाज कराया गया. जब दोनों की हालत थोड़ी ठीक हुई तब देर रात बारात बक्सवाहा के लिए रवाना हुई.
हटा थाना प्रभारी सुधीर बेगी के मुताबिक पीड़ितों की शिकायत पर लोधी समाज के लोगों पर SC/ST Act के अलावा अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया है और मामले की जांच भी की जा रही है. वहीं एहतियात के तौर पर बिजोरी पाठक गांव में पुलिस बल को भेजा गया है. इस मामले ने फिर बुंदेलखंड अंचल में दलितों की वास्तविक स्थिति को सामने लाकर खड़ा किया है और कहीं न कहीं इस वारदात ने सरकार और प्रशासन के दावों की कलई भी खोल दी है. हाईन्यूज़ !















