हैदराबाद के अट्टापुर इलाके में गुरुवार (26 फरवरी) को बटरफ्लाई हॉस्पिटल में इलाज के दौरान एक 8 साल की मासूम लड़की की मौत हो गई. परिवार ने सीधा आरोप लगाया कि बच्ची पिछले दो दिन से बेसुध पड़ी थी, बार-बार शिकायत करने के बावजूद डॉक्टरों ने कोई ध्यान नहीं दिया. इलाज पर 12 से 14 लाख रुपये खर्च हो गए, लेकिन बच्ची बच न सकी.
एक वीडियो में आईसीयू के अंदर सिर्फ नर्सें दिख रही हैं, कोई डॉक्टर नजर नहीं आ रहा. मौत की खबर फैलते ही परिवार ने हॉस्पिटल के अंदर और बाहर प्रदर्शन शुरू कर दिया, माहौल तनावपूर्ण हो गया और पुलिस को तैनात करना पड़ा. परिजन अब अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.
मां-बाप ने क्या बताया
घटनास्थल पर बच्ची के मां-बाप और रिश्तेदार रो-रोकर बिलखते दिखे. मां का कहना था कि हमने इतना पैसा लगाया, हर घंटे पूछते रहे कि बच्ची कैसी है, लेकिन जवाब मिलता सिर्फ ‘सब ठीक है’. दो दिन से वो कुछ बोल नहीं रही थी फिर भी कोई डॉक्टर नहीं आया.” पिता ने गुस्से में कहा, “ये हॉस्पिटल मरीजों को ठीक करने आया है या पैसा कमाने?” हॉस्पिटल के गेट पर तख्तियां उठाए लोग चिल्ला रहे थे “डॉक्टरों को सजा दो, न्याय दो!”
पुलिस ने शुरू की जांच
गुद्दिमलकापुर पुलिस स्टेशन की टीम तुरंत मौके पर पहुंची. पुलिस ने परिवार की शिकायत दर्ज कर ली और जांच शुरू कर दी है. फिलहाल हॉस्पिटल प्रबंधन की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. परिवार का आरोप है कि आईसीयू में डॉक्टरों की गैरमौजूदगी साफ नजर आ रही है, जो लापरवाही को साबित करता है. बच्ची को कब एडमिट किया गया था, इसकी सही डिटेल अभी सामने नहीं आई, लेकिन परिवार का कहना है कि सामान्य बुखार से शुरू होकर हालत बिगड़ी और इलाज न मिलने से मौत हो गई.
यह घटना हैदराबाद के प्राइवेट हॉस्पिटलों में बढ़ती लापरवाही की कहानी को फिर दोहराती है. कुछ दिन पहले ही राजेंद्रनगर के क्रेयॉन्स हॉस्पिटल में एक छह महीने के बच्चे की मौत एक्सपायर्ड इंजेक्शन देने से हो गई थी. ऐसे मामले आम हो गए हैं, जहां अमीर-गरीब दोनों परिवार लाखों रुपये खर्च कर भी अपने बच्चे नहीं बचा पाते. सरकार को अब सख्त नियम बनाने चाहिए ताकि ऐसे हॉस्पिटल बंद हो सकें जो मरीजों की जान से खेलते हैं. हाईन्यूज़ !















