बिहार सरकार के गृह विभाग की ओर से 3 सितंबर को जारी अधिसूचना को लेकर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने सोमवार को स्थिति स्पष्ट की. सीबीआई अधिकारियों के मुताबिक, नई अधिसूचना से एजेंसी को पहले की तुलना में अधिक व्यापक अधिकार मिले हैं. अधिकारियों ने कहा कि नए आपराधिक कानून लागू होने के बाद यह बदलाव जरूरी था.
सीबीआई के मुताबिक, अधिसूचना को लेकर मीडिया के एक हिस्से में यह जोर दिया गया कि राज्य सरकार की पूर्व सहमति अनिवार्य होगी. एजेंसी ने इसे अधिसूचना की सही समझ के अभाव का नतीजा बताया है. अधिकारियों का कहना है कि नई अधिसूचना की तुलना 1996 में बिहार सरकार की ओर से जारी अधिसूचना से की जानी चाहिए.
1996 की अधिसूचना में नए कानून शामिल नहीं थे
सीबीआई अधिकारियों के अनुसार, बिहार सरकार की वर्ष 1996 की पुरानी अधिसूचना में उस समय लागू कानूनी प्रावधानों के अनुरूप एजेंसी के अधिकारों का उल्लेख था. लेकिन वर्ष 2023 में नए आपराधिक कानून लागू होने के बाद भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) अस्तित्व में आए. पुरानी अधिसूचना में इन नए कानूनों का उल्लेख नहीं था.
नई अधिसूचना में इन कानूनों को शामिल किए जाने से सीबीआई की जांच संबंधी शक्तियों और अधिकार क्षेत्र को मौजूदा कानूनी व्यवस्था के अनुरूप किया गया है.
अधिकारियों के मुताबिक, नई अधिसूचना में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (Information Technology Act) से संबंधित प्रावधानों को भी शामिल किया गया है. डिजिटल अपराध और साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के बीच इसे महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है.
सीबीआई का तर्क
सीबीआई अधिकारियों का कहना है कि नई अधिसूचना का उद्देश्य एजेंसी की शक्तियों को सीमित करना नहीं, बल्कि उन्हें मौजूदा कानूनी ढांचे के अनुरूप बनाना है. अधिकारियों के अनुसार, 1996 की अधिसूचना के बाद देश में आपराधिक कानूनों में बड़ा बदलाव हुआ है. ऐसे में जांच एजेंसी के अधिकारों को नए कानूनों के संदर्भ में स्पष्ट करना आवश्यक था.
सीबीआई का दावा है कि 3 सितंबर की नई अधिसूचना उसे 1996 की अधिसूचना की तुलना में व्यापक शक्तियां प्रदान करती है और नए आपराधिक कानूनों तथा आईटी कानून के तहत जांच के लिए कानूनी आधार को अपडेट करती है. हाईन्यूज़ !














