कर्नाटक के बीजेपी विधायक बालचंद्र जारकीहोली ने राजनेताओं के लिए भी रिटायरमेंट की उम्र तय करने की मांग उठाई है. उन्होंने सवाल किया कि जब सरकारी कर्मचारियों के लिए 60 साल की उम्र में रिटायरमेंट का नियम है, तो MLA, MP और मंत्रियों के लिए ऐसी कोई सीमा क्यों नहीं होनी चाहिए?
बेलगावी में शिक्षक दिवस के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बालचंद्र जारकीहोली ने कहा कि राजनेता 70 और 80 साल की उम्र तक भी सक्रिय राजनीति में बने रहते हैं. उनके मुताबिक, उम्र बढ़ने के साथ स्वास्थ्य और काम करने की क्षमता पर भी असर पड़ता है.
उन्होंने कहा कि सांसदों, विधायकों और मंत्रियों के लिए भी रिटायरमेंट की उम्र तय करने वाला विधेयक संसद में लाया जाना चाहिए.
‘मैं खुद 60 साल का हूं, पहले जैसी ऊर्जा महसूस नहीं होती’
बालचंद्र जारकीहोली ने अपने अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि वह खुद अब 60 साल के हैं और उन्हें भी पहले जैसी ऊर्जा महसूस नहीं होती.
उन्होंने कहा, “सरकारी कर्मचारियों की रिटायरमेंट उम्र 60 साल है, लेकिन यही नियम राजनेताओं, विधायकों, सांसदों या मंत्रियों पर क्यों लागू नहीं होना चाहिए? वे 70 और 80 साल की उम्र में भी राजनीति में बने रहते हैं. नेताओं के लिए रिटायरमेंट की उम्र क्यों नहीं होनी चाहिए?”
उन्होंने आगे कहा कि उम्र के साथ स्वास्थ्य हमेशा साथ नहीं देता और व्यक्ति उतनी दक्षता से काम नहीं कर पाता, जितना वह पहले करता था.
संसद में बिल लाने की मांग
बीजेपी विधायक ने कहा कि उनके विचार से निर्वाचित जनप्रतिनिधियों और मंत्रियों के लिए उम्र सीमा निर्धारित करने वाला कानून संसद में लाया जाना चाहिए.
उन्होंने कहा, “मैं 60 साल का हूं और मुझे लगता है कि मेरे अंदर पहले जैसी ऊर्जा नहीं है. उम्र के साथ स्वास्थ्य भी हमेशा हमें उसी दक्षता से काम करने की इजाजत नहीं देता.”
बालचंद्र जारकीहोली का यह बयान ऐसे समय आया है, जब देश में लंबे समय से राजनेताओं की उम्र, नेतृत्व में पीढ़ीगत बदलाव और वरिष्ठ नेताओं की भूमिका को लेकर बहस होती रही है. हाईन्यूज़ !














