US Iran Peace Deal: मिडिल ईस्ट में लंबे समय से जारी तनाव को कम करने की दिशा में अमेरिका ने बड़ा कदम उठाते हुए ईरान के साथ हुए अंतरिम शांति समझौते के बाद शुरुआती राहत देना शुरू कर दिया है. पहली बातचीत के बाद अमेरिका ने 60 दिनों के लिए ईरान पर लगे प्रतिबंधों में ढील दे दी है, जिससे तेहरान को आर्थिक राहत मिल सके. हालांकि इस राहत के साथ सख्त चेतावनी भी दी गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि ईरान समझौते की शर्तों का पालन नहीं करता है, तो अमेरिका “वही करेगा जो उसे करना होगा.” यानी यह संकेत भी साफ है कि यह राहत पूरी तरह शर्तों से जुड़ी हुई है और भरोसे का माहौल अभी भी अधूरा है.
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्विट्जरलैंड में हुई बातचीत को सकारात्मक बताते हुए कहा कि इससे एक स्थायी शांति समझौते की मजबूत नींव तैयार हुई है. लेकिन दूसरी ओर ईरान ने अमेरिका के दावों को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया है. ईरान ने साफ किया है कि उसने अपने परमाणु कार्यक्रम पर कोई नई बातचीत शुरू नहीं की है और न ही अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों को वापस बुलाने पर सहमति जताई है.
शांति समझौते के साथ वॉर्निंग
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघेई ने इस स्थिति को और स्पष्ट करते हुए कहा कि स्विट्जरलैंड में IAEA प्रमुख राफेल ग्रोसी के साथ कोई बैठक नहीं हुई है और फिलहाल ईरान अपने परमाणु ठिकानों के निरीक्षण की अनुमति देने की योजना में नहीं है. इससे साफ है कि परमाणु मुद्दे पर दोनों देशों के बीच अब भी गहरी खाई बनी हुई है. इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान और कतर जैसे मध्यस्थ देशों की भूमिका भी अहम रही है. इन देशों के मुताबिक स्विट्जरलैंड के बुर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में हुई बातचीत के दौरान दोनों पक्ष 60 दिनों के भीतर एक स्थायी समझौते के लिए रोडमैप तैयार करने पर सहमत हुए हैं.
यह रोडमैप पिछले सप्ताह हुए अंतरिम समझौते को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. समझौते के तहत दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय तनाव कम करने के लिए कुछ अहम बिंदुओं पर सहमति जताई है. इनमें इजरायल और लेबनान में हिजबुल्लाह के बीच चल रही लड़ाई को खत्म करने के लिए एक मैकेनिज्म तैयार करना शामिल है. इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक सीधी संचार लाइन भी स्थापित की गई है. यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम है, जिसे युद्ध के दौरान ईरान ने बाधित कर दिया था.
आर्थिक मोर्चे पर राहत देने के लिए अमेरिका ने 21 अगस्त तक प्रतिबंधों में छूट की घोषणा की है, जिससे ईरान को तेल और उससे जुड़े उत्पादों की बिक्री और भुगतान प्राप्त करने की अनुमति मिल गई है. यह कदम ईरान की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी राहत माना जा रहा है. जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अली बहरीनी ने भी बातचीत में “अच्छी प्रगति” की बात कही है.
दो महीने के लिए ईरान को छूट
उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में दो अलग-अलग कार्य समूह बनाए जाएंगे, जो एक तरफ प्रतिबंधों को हटाने और दूसरी तरफ ईरान की परमाणु गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करेंगे. हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि परमाणु मुद्दे पर किसी भी ठोस बातचीत से पहले प्रारंभिक समझौते के सभी हिस्सों को पूरी तरह लागू करना जरूरी होगा. इसके साथ ही लेबनान का मुद्दा भी इस समझौते का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है.
ईरान का कहना है कि इस डील में लेबनान से इजरायली सैनिकों की वापसी शामिल है, जबकि इजरायल अब भी दक्षिणी लेबनान में सुरक्षा क्षेत्र बनाए रखने की बात कर रहा है और संभावित खतरों को खत्म करने के लिए कार्रवाई जारी रखने का संकेत दे रहा है. कुल मिलाकर देखा जाए तो यह समझौता एक बड़ी शुरुआत जरूर है, लेकिन अभी भी कई जटिल मुद्दे ऐसे हैं जिन पर सहमति बनना बाकी है. प्रतिबंधों में अस्थायी ढील, कूटनीतिक बातचीत की शुरुआत और क्षेत्रीय तनाव में कमी जैसे संकेत सकारात्मक हैं, लेकिन परमाणु कार्यक्रम, इजरायल-लेबनान संघर्ष और आपसी अविश्वास जैसे मुद्दे यह साफ करते हैं कि स्थायी शांति की राह अभी भी लंबी और चुनौतीपूर्ण है. हाईन्यूज़ !















