Women Reservation Bill:HN/ लोकसभा में 131वें संविधान संशोधन (महिला आरक्षण) बिल पर हुई वोटिंग में यह विधेयक पास नहीं हो पाया. कुल 532 वोटों में से 298 समर्थन में और 230 विरोध में पड़े, लेकिन आवश्यक बहुमत न मिलने के कारण बिल गिर गया. इस पर कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनकी पार्टी महिलाओं के आरक्षण का विरोध नहीं करती, लेकिन पुरानी जनगणना और परिसीमन से जोड़कर इसे लागू करना स्वीकार्य नहीं है, खासकर जब इसमें ओबीसी वर्ग को शामिल नहीं किया गया. उन्होंने इसे लोकतंत्र और देश की एकता के लिए “जीत” बताया और कहा कि यह संविधान पर हमला था, जिसे रोक दिया गया.
प्रियंका बोलीं- मसीहा का खोखला प्रयास
प्रियंका गांधी ने ट्वीट करते हुए सोशल मीडिया एक्स पर लिखा- संसद और विधानसभाओं में महिला आरक्षण इस देश की महिलाओं का हक है जो उनको मिलने से कोई नहीं रोक सकता। एक दिन यह हकीकत में परिवर्तित होकर रहेगा. मगर बदनीयती से इसे 2011 की जनगणना और उस पर आधारित परिसीमन से जोड़कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का महिलाओं का मसीहा बनने का खोखला प्रयास आज नाकाम रहा.
उन्होंने आगे लिखा कि आज, देश के विपक्ष ने अपनी दृढ़ता और एकजुटता दिखाकर भारत के लोकतंत्र और इसकी अखंडता को अक्षुण्ण रखा है. भारत की राजनीति में आज का दिन ऐतिहासिक माना जायेगा. आज से इस देश की आवाज़ को दबाने का काम बंद. मैं विपक्ष के सभी सांसदों को दिल से धन्यवाद देती हूं क्योंकि अंतर्मन में हम सब जानते हैं कि अगर ये तीन विधेयक पारित होते तो हमारे देश में लोकतंत्र नहीं बचता. अपनी शक्ति का सही इस्तेमाल करके हमने इस देश को राजनीति से ऊपर रखा है और देश के हित में अपना कर्तव्य निभाया है.
क्या बोले राहुल गांधी?
वहीं लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी इसी लाइन पर सरकार पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि यह “असल महिला आरक्षण बिल नहीं” था, बल्कि भारत के राजनीतिक नक्शे (इलेक्टोरल मैप) को बदलने की कोशिश थी. राहुल गांधी ने दोहराया कि अगर सरकार 2023 वाला महिला आरक्षण बिल लागू करती है, तो विपक्ष उसे “100 प्रतिशत समर्थन” देगा.
कुल मिलाकर, कांग्रेस का रुख साफ रहा—
महिला आरक्षण का समर्थन ✔️
लेकिन परिसीमन + पुरानी जनगणना + ओबीसी प्रतिनिधित्व की कमी के साथ नहीं ❌
इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि महिला आरक्षण का मुद्दा अब सिर्फ जेंडर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह राजनीतिक प्रतिनिधित्व, सामाजिक न्याय और चुनावी गणित का बड़ा मुद्दा बन गया है.
महिला आरक्षण पर तीखी बहस
महिला आरक्षण विधेयक को लेकर लोकसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली. एक तरफ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सभी दलों से इस बिल का समर्थन करने की अपील की, तो वहीं विपक्ष ने इसे लेकर गंभीर आपत्तियां उठाईं. लोकसभा में बोलते हुए विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस बिल को “छलावा” करार दिया और कहा कि “यह बिल यहीं गिर जाएगा.” उन्होंने दावा किया कि यह वास्तव में महिलाओं के हित में लाया गया विधेयक नहीं है.
राहुल गांधी ने अपने भाषण में कहा कि 2023 में जो महिला आरक्षण बिल पास हुआ था, उसी समय सत्ता पक्ष के सहयोगियों ने संकेत दिया था कि इसे लागू करने में लंबा समय लग सकता है. उनके मुताबिक, मौजूदा प्रस्ताव के जरिए असल मुद्दे से ध्यान हटाया जा रहा है. हाईन्यूज़ !















