सामाजिक सुधार और फिजूलखर्ची के खिलाफ अखिल भारतीय चंद्रवंशी खाती समाज ने एक ऐतिहासिक और साहसिक निर्णय लिया है. इछावर क्षेत्र के ग्राम पंचायत खेरी में समाज द्वारा वर्षों से चली आ रही ‘बर्तन प्रथा’ को पूरी तरह समाप्त करने का संकल्प लिया गया है. यह कदम समाज में बढ़ रहे आर्थिक बोझ और दिखावे की संस्कृति को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है.
गुरुवार (27 फरवरी) को ग्राम पंचायत खेरी स्थित हनुमान मंदिर परिसर में समाज की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई. इस बैठक में सरपंच प्रतिनिधि धनपाल सिंह वर्मा और गांव के पटेल मेहरबान सिंह वर्मा के नेतृत्व में समाज के वरिष्ठजनों और प्रबुद्ध नागरिकों ने हिस्सा लिया. विचार-विमर्श के दौरान यह बात सामने आई कि होली जैसे त्योहारों पर उपहारों और बर्तनों के लेन-देन की प्रतिस्पर्धा से गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों की कमर टूट रही है. चर्चा के बाद, सर्वसम्मति से इस कुरीति को तुरंत प्रभाव से प्रतिबंधित करने का निर्णय लिया गया.
नियम तोड़ने पर लगेगा 5000 रुपये का आर्थिक दंड
समाज ने इस नियम को कड़ाई से लागू करने के लिए दंड का प्रावधान भी किया है. यदि समाज का कोई भी परिवार इस निर्णय का उल्लंघन कर ‘बर्तन प्रथा’ को जारी रखता है, तो उस पर 5000 रुपये का आर्थिक जुर्माना लगाया जाएगा. पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जुर्माने से प्राप्त होने वाली राशि का उपयोग व्यक्तिगत कार्यों के बजाय समाज के सामूहिक विकास और जनहित के कार्यों में किया जाएगा.
फिजूलखर्ची और भेदभाव पर लगेगी लगाम
बैठक में उपस्थित वरिष्ठजनों ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि त्योहारों के नाम पर उपहारों का लेन-देन अब एक प्रतिस्पर्धा बन चुका है, जो समाज में आर्थिक भेदभाव पैदा करता है. इस प्रतिबंध से न केवल फिजूलखर्ची रुकेगी, बल्कि समाज के सभी वर्गों के बीच समानता का भाव जागृत होगा. ग्रामीणों और युवाओं ने भी इस फैसले का दिल खोलकर स्वागत किया है.
सादगी से मनेगी खुशियों की होली
समाज के पदाधिकारियों का मानना है कि विकास के लिए पुरानी और बोझिल परंपराओं को त्यागना अनिवार्य है. होली प्रेम और भाईचारे का प्रतीक है, जिसे सादगी के साथ मनाया जाना चाहिए. यह फैसला समाज के हर वर्ग, विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के हित को ध्यान में रखकर लिया गया है. इस निर्णय की आसपास के क्षेत्रों में भी काफी सराहना हो रही है. हाईन्यूज़ !















