पाकिस्तान को जिसने घुटनों पर लाकर दिखाई उसकी ‘औकात’, PM मोदी ने उसका इजरायल की संसद को सुनाया पूरा किस्सा

PM Modi About JFR Jacob:HN/ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय इजरायल दौरे पर हैं. बुधवार को उन्होंने इजरायल की संसद कनेसेट को संबोधित किया और ऐसा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बन गए. साल 2017 में उनके पहले इजरायल दौरे के बाद से दोनों देशों के रिश्ते एक नए स्तर पर पहुंच चुके हैं. इस बार दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के संबोधन में भी इन मजबूत रिश्तों की साफ झलक देखने को मिली.

प्रधानमंत्री मोदी से पहले इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कनेसेट को संबोधित करते हुए पीएम मोदी को दोस्त से बढ़कर भाई बताया. अपने भाषण में पीएम मोदी ने कई अहम बातों का जिक्र किया. उन्होंने बताया कि उनका जन्म 17 सितंबर 1950 को हुआ था और इसी दिन भारत ने इजरायल को मान्यता दी थी. यह संयोग दोनों देशों के रिश्तों को और खास बनाता है.

1971 के युद्ध के नायक का जिक्र

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में 1971 के भारत पाकिस्तान युद्ध के नायक लेफ्टिनेंट जनरल जेएफआर जैकब का भी विशेष रूप से जिक्र किया. उन्होंने कहा कि जैकब का योगदान व्यापक रूप से जाना जाता है. प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि रिटायरमेंट के बाद उन्होंने जैकब के साथ चाय पर कई बार बातचीत की थी, जिसमें भारत और इजरायल के संबंधों पर चर्चा हुई थी.

पीएम मोदी का यह जिक्र केवल इतिहास को याद करना नहीं था, बल्कि भारत और इजरायल के गहरे और मजबूत रिश्तों का प्रतीक भी था. 1971 के युद्ध में एक यहूदी मूल के भारतीय सैन्य अधिकारी ने ऐसी रणनीति बनाई थी, जिसने पाकिस्तान को घुटनों पर ला दिया और दुनिया के नक्शे पर एक नए देश बांग्लादेश का जन्म हुआ. आज जब भारत आधुनिक रक्षा साझेदारी की बात करता है तो 1971 की वही रणनीतिक जीत फिर से चर्चा में आ जाती है.

कौन थे लेफ्टिनेंट जनरल जेएफआर जैकब

लेफ्टिनेंट जनरल जेएफआर जैकब भारतीय सेना के सबसे प्रतिभाशाली और रणनीतिक अधिकारियों में गिने जाते हैं. 1971 के भारत पाकिस्तान युद्ध के दौरान वे भारतीय सेना की ईस्टर्न कमांड के चीफ ऑफ स्टाफ थे. पूरे अभियान की सैन्य योजना तैयार करने में उनकी मुख्य भूमिका रही.

कोलकाता स्थित कमांड मुख्यालय से उन्होंने युद्ध की दिशा तय की. पूर्वी पाकिस्तान जो अब बांग्लादेश है, वहां की भौगोलिक चुनौतियों जैसे नदियां, दलदली इलाके और सीमित सड़कों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने पारंपरिक मोर्चा दर मोर्चा लड़ाई के बजाय तेज और लक्ष्य केंद्रित रणनीति बनाई. उनका मकसद केवल जमीन पर कब्जा करना नहीं था, बल्कि युद्ध को जल्दी खत्म कर राजनीतिक परिणाम हासिल करना था. उनकी सोच ने भारतीय सेना को निर्णायक बढ़त दिलाई और उन्हें 1971 की जीत के प्रमुख शिल्पकारों में शामिल कर दिया.

1971 के युद्ध में उनकी रणनीति

जैकब ने पारंपरिक युद्ध पद्धति को बदलते हुए गतिशील युद्ध की रणनीति अपनाई. इस योजना का मुख्य सिद्धांत था कि दुश्मन के मजबूत ठिकानों पर सीधे हमला करने के बजाय उन्हें नजरअंदाज करते हुए तेजी से महत्वपूर्ण केंद्रों पर कब्जा किया जाए.

भारतीय सेना छोटे छोटे समूहों में आगे बढ़ी और पाकिस्तानी सेना की संचार और सप्लाई लाइनों को काट दिया. पुलों, संचार नेटवर्क और रसद व्यवस्था को निशाना बनाया गया. इससे पाकिस्तानी सेना धीरे धीरे अलग थलग पड़ती चली गई. इस रणनीति से युद्ध की गति भारत के नियंत्रण में आ गई. नतीजा यह हुआ कि पाकिस्तान को लंबी लड़ाई का मौका नहीं मिला और भारतीय सेना कम समय में ढाका तक पहुंच गई.

भारत और इजरायल से जुड़ाव

जेएफआर जैकब यहूदी मूल के भारतीय थे और कोलकाता के यहूदी समुदाय से जुड़े थे. उन्होंने हमेशा खुद को पहले भारतीय सैनिक माना, लेकिन उनकी पहचान भारत और यहूदी समुदाय के ऐतिहासिक रिश्तों का प्रतीक भी रही. भारत और इजरायल के बीच औपचारिक संबंध बाद में मजबूत हुए, लेकिन जैकब जैसे व्यक्तित्व दोनों देशों के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक जुड़ाव की मिसाल बने. इसी कारण भारतीय नेतृत्व ने कई मौकों पर उनका जिक्र करते हुए लोकतंत्र, सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग जैसे साझा मूल्यों को रेखांकित किया. हाईन्यूज़ !

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