मतदान में बारामूला ने बनाया ऐसा रिकॉर्ड हर कोई हैरान, 1984 के बाद हुआ ऐसा

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Lok Sabha Elections 2024 Latest news: कभी आतंकवादी घटनाओं और सेना की अधिक तैनाती के लिए जाना जाने वाला जम्मू-कश्मीर का बारामूला एक बार फिर सुर्खियों में है. इस बार वजह आतंकवाद नहीं, बल्कि यहां हुई रेकॉर्ड तोड़ वोटिंग है. बारामूला लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में 20 मई को पांचवें चरण की वोटिंग में अब तक का सबसे अधिक मतदान हुआ.

वह सीट, जहां 1967 में पहला संसदीय चुनाव हुआ था, इस बार यहां 59 प्रतिशत का मतदान दर्ज किया गया. इस सीट पर पिछला सबसे अधिक मतदान 1984 में 58.90 प्रतिशत दर्ज किया गया था.

कई बड़े नाम थे इस बार चुनावी मैदान में

इस निर्वाचन क्षेत्र में 17,37,865 रजिस्टर्ड वोटर हैं और इस बार चुनाव में इस सीट पर 22 उम्मीदवार ताल ठोक रहे थे. इनमें जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद गनी लोन और अवामी इत्तेहाद पार्टी (एआईपी) के जेल में बंद प्रमुख शेख अब्दुल राशिद उर्फ इंजीनियर राशिद जैसे बड़े नाम भी शामिल थे.

रिकॉर्ड तोड़ मतदान के पीछे के कारण

एक्सपर्ट की मानें तो इस बार यहां हुए रिकॉर्ड तोड़ मतदान के पीछे कई वजह हैं. आइए डालते हैं कुछ प्रमुख कारणों पर एक नजर.

1. बेहतर सुरक्षा

अधिक वोटिंग के पीछे सबसे बड़ी वजह यहां बेहतर सुरक्षा व्यवस्था का होना है. पिछले तीन दशकों में पहली बार चुनाव से पहले और उसके दौरान कोई आतंकवादी खतरा नहीं था और कोई बहिष्कार का आह्वान नहीं किया गया था. इससे भयमुक्त माहौल बना और आम लोग बिना किसी डर के घर से बाहर आकर मतदान कर सके.

2. अनुच्छेद 370 को हटाना

एक्सपर्ट की मानें तो अधिक मतदान के पीछे ये भी एक वजह है. अनुच्छेद 370 हटाने के बाद से पिछले पांच वर्षों में, राजनीतिक गतिविधि और चुनावी राजनीति में अचानक रुकावट आ गई थी, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की वापसी की मांग जोर पकड़ने लगी थी. विशेष रूप से राजनीतिक कार्यकर्ता चुनाव फिर से शुरू होने के लिए उत्सुक थे और उन्होंने उत्साहपूर्वक इसमें भाग लिया.

3. नौकरशाही नियंत्रण के प्रति जनता की निराशा

इस बार अधिक मतदान के पीछे ये भी एक वजह रही. लोग लगातार शिकायत कर रहे थे कि नौकरशाही नियंत्रण ने सरकारी कार्यालयों तक उनकी पहुंच सीमित कर दी है और उनके दैनिक मुद्दों और समस्याओं का समाधान उतने प्रभावी ढंग से नहीं किया जा रहा है जितना कि निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में होता है. ऐसे में जब लोगों को अपने जनप्रतिनिधि को चुनने का मौका मिला तो उन्होंने इसमें बढ़चढ़कर भाग लिया.

4. इंजीनियर रशीद फैक्टर

इसके अलावा, ‘इंजीनियर रशीद फैक्टर’ ने भी मतदान प्रतिशत को काफी प्रभावित किया. यूएपीए अधिनियम के तहत जेल में बंद लैंगेट के एक तेजतर्रार राजनेता और ‘इंजीनियर राशिद’ के नाम से मशहूर अब्दुल रशीद कारावास के बावजूद एक बहुत ही सफल चुनाव अभियान चलाने में कामयाब रहे. उनके बेटे ने अभियान का नेतृत्व किया, जिसे विशेष रूप से युवाओं से भारी प्रतिक्रिया मिली. सहानुभूति कारक ने उनके पक्ष में काम किया, जिससे कई क्षेत्रों में इस बार मतदान हुआ, जिन्होंने ऐतिहासिक रूप से चुनावों का बहिष्कार किया था.

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