राज्यसभा चुनाव में मध्य प्रदेश से कांग्रेस की प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. मीनाक्षी की तरफ से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने चुनाव परिणाम पर रोक की मांग की, लेकिन कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया. जजों ने याचिका के सुनवाई योग्य होने पर भी सवाल उठाए. हालांकि, सिंघवी के अनुरोध पर कोर्ट ने केस को शुक्रवार (12 जून, 2026) को सुनवाई के लिए लगा दिया.
सिंघवी का कहना था कि रिटर्निंग ऑफिसर ने तेलंगाना में लंबित एक निजी शिकायत की जानकारी छुपाने के आधार पर नामांकन खारिज किया है. उस मामले में नटराजन को सिर्फ कोर्ट का नोटिस मिला है. इसे कानूनन संज्ञान लेना नहीं कहा जा सकता. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 33A के तहत नामांकन पत्र में सिर्फ उन्हीं आपराधिक मामलों की जानकारी देना जरूरी है, जिन पर किसी कोर्ट ने संज्ञान लिया हो.
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस ए एस चंदुरकर की बेंच के सामने जिरह करते हुए सिंघवी ने बताया कि गुरुवार को ही नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख है. अगर सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत सुनवाई नहीं की तो चुनाव परिणाम घोषित हो जाएगा और बीजेपी के तीनों उम्मीदवार विजय हासिल कर लेंगे लेकिन जज इस दलील से आश्वस्त नजर नहीं आए.
कोर्ट ने याचिका के विचार योग्य होने पर सवाल उठाया. दरअसल, संविधान के अनुच्छेद 329 में यह व्यवस्था है कि चुनावी मामलों में कोर्ट अंतरिम चरण में हस्तक्षेप नहीं करता. इसी अनुच्छेद में यह भी कहा गया है कि चुनाव परिणाम आने के बाद असंतुष्ट उम्मीदवार हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर सकता है.
मामले में निर्वाचन अधिकारी की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी और चुनाव आयोग के लिए पेश वरिष्ठ वकील डी एस नायडू ने भी याचिका के सुनवाई योग्य न होने की दलील दी. हालांकि, सिंघवी के अनुरोध पर जजों ने मामले को शुक्रवार, 12 जून को सुनवाई के लिए लगा दिया. सिंघवी ने सुनवाई होने तक चुनाव परिणाम की घोषणा रोकने की मांग की, लेकिन कोर्ट ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की. हाईन्यूज़ !















