टीकमगढ़ | 26 जुलाई 2026: HN/ टीकमगढ़ नगरपालिका से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितता प्रकरण में मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) ओम पाल भदौरिया की पदोन्नति को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। 23 जुलाई 2026 को नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा जारी पदोन्नति आदेश पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया गया है कि अधिकारी के विरुद्ध विभागीय जांच लंबित होने के बावजूद उन्हें श्रेणी ‘ख’ में पदोन्नति प्रदान कर दी गई।
प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि आयुक्त, नगरीय प्रशासन एवं विकास के पत्र क्रमांक 6102 दिनांक 16 मार्च 2026 के माध्यम से श्री भदौरिया के विरुद्ध म.प्र. सिविल सेवा (CCA) नियम, 1966 के नियम 14 के अंतर्गत विभागीय जांच प्रारंभ की गई थी। आरोपों के अनुसार संजीवनी क्लिनिक निर्माण में जलभराव क्षेत्र में भवन निर्माण तथा ₹21,42,628 की शासकीय राशि से संबंधित आर्थिक क्षति के मामले की जांच अभी भी लंबित है।
प्रेस विज्ञप्ति में यह भी कहा गया है कि प्रमुख अभियंता की तीन सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट (15 दिसंबर 2025) में टीकमगढ़ नगरपालिका की वित्तीय अनियमितताओं के लिए उत्तरदायी अधिकारियों की सूची में श्री भदौरिया का नाम भी शामिल था।
पदोन्नति प्रक्रिया पर उठे प्रश्न
विज्ञप्ति में आरोप लगाया गया है कि म.प्र. लोक सेवा पदोन्नति नियम, 2025 के अनुसार यदि किसी अधिकारी के विरुद्ध आरोपपत्र लंबित हो तो उसका मामला ‘सीलबंद लिफाफा’ (Sealed Cover Procedure) के अंतर्गत रखा जाना चाहिए। आरोप है कि इस प्रक्रिया का पालन किए बिना पदोन्नति आदेश जारी किया गया।
साथ ही सर्वोच्च न्यायालय के Union of India vs. K.V. Jankiraman (1991) तथा State of MP vs. J.S. Bansal (2016) के निर्णयों का हवाला देते हुए पदोन्नति की वैधता पर भी प्रश्न उठाए गए हैं।
दोहरे मापदंड का आरोप
विज्ञप्ति में कहा गया है कि जिन मामलों में कथित वित्तीय अनियमितताओं के आधार पर निर्वाचित नगरपालिका अध्यक्ष के विरुद्ध कार्रवाई की गई, उन्हीं मामलों से जुड़े अधिकारियों के खिलाफ समान कार्रवाई नहीं हुई। आरोप लगाया गया है कि संबंधित अधिकारी को पदोन्नति देकर प्रशासन ने दोहरे मापदंड अपनाए हैं।
प्रमुख मांगें
प्रेस विज्ञप्ति में मांग की गई है कि—
- 23 जुलाई 2026 को जारी पदोन्नति आदेश तत्काल निरस्त किया जाए।
- पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।
- यदि पदोन्नति प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन या तथ्यों को छिपाने की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।
विभाग का पक्ष
इस संबंध में संबंधित विभाग या अधिकारी का आधिकारिक पक्ष समाचार लिखे जाने तक प्राप्त नहीं हो सका है। पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा. हाईन्यूज़ !














