AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने रविवार (31 अगस्त, 2025) को तियानजिन में हुई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात को लेकर बयान दिया है. उन्होंने पीएम मोदी और शी जिनपिंग की हुई बैठक को पूरी तरह से विफल करार दिया है. उन्होंने कहा कि जिन सवालों के जवाब की तलाश भारत के लोगों को थी, उन्हें इस बैठक से उनके जवाब नहीं मिले.
असदुद्दीन ओवैसी ने पीएम मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर रविवार (31 अगस्त, 2025) को एक पोस्ट साझा किया. पोस्ट में ओवैसी ने कहा, ‘चीन के राष्ट्रपति के साथ आज भारत के प्रधानमंत्री की बैठक उन महत्वपूर्ण सवालों के जवाब देने में विफल रही है जिनकी भारतीयों को तलाश थी.‘
पीएम मोदी और शी जिनपिंग की बैठक को लेकर क्या बोले ओवैसी?
AIMIM चीफ ने कहा, ‘इस सूची में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को चीन का समर्थन और अफगानिस्तान में CPEC का विस्तार करने का सवाल सबसे ऊपर है. हमने चीन की ओर जल विज्ञान संबंधी नदी डेटा साझा करने पर भी एक शब्द भी नहीं सुना है. लद्दाख में सीमा की स्थिति भी ऐसी है कि हमारे बहादुर सैनिक बफर जोन में गश्त नहीं कर सकते हैं और साल 2020 के बाद हमारे चरवाहों को कई क्षेत्रों में जाने की अनुमति नहीं है. इसके अलावा, दुर्लभ मृदा और अन्य महत्वपूर्ण वस्तुओं की आपूर्ति फिर से शुरू करने के बारे में भी चीन ने कोई वादा नहीं किया है. न ही उसने कहा है कि वह भारत से और सामान आयात करेगा. ये वे मुद्दे हैं जो भारतीयों के लिए मायने रखते हैं, न कि फोटो खिंचवाने का अवसर, जैकेट का रंग या कालीन की लंबाई. दुख की बात है कि मोदी-शी जिनपिंग की बैठक ठोस मुद्दों पर कोई समाधान निकालने में विफल रही.’
द्विपक्षीय बैठक में पीएम मोदी ने जिनपिंग के साथ कई मुद्दों पर की चर्चा
विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने एससीओ शिखर सम्मेलन के पहले द्विपक्षीय वार्ता की. इस दौरान दोनों नेताओं ने आतंकवाद और बहुपक्षीय प्लेटफॉर्म्स पर निष्पक्ष व्यापार जैसे द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों और चुनौतियों पर भारत और चीन के साझा आधार को बढ़ाने की आवश्यकता पर चर्चा किया है. हाईन्यूज़ !