दो गांवों के बीच के एक नदी, दोनों ओर के लोग बरसाते हैं एक दूसरे पर पत्थर…और ये सब कुछ होता है एक उत्सव. जी हां, ये उत्सव मध्य प्रदेश के पांढुर्ना जिले में हर साल मनाया जाता है, लेकिन शनिवार (23 अगस्त) को आयोजित इस वार्षिक गोटमार उत्सव के दौरान कई लोग घायल हो गए.
इस परंपरागत मेले के दौरान पथराव में 800 से ज्यादा लोग घायल हो गए, जिनमें 5 की हालत गंभीर बताई जा रही है. अधिकारियों के मुताबिक, दो घायलों- पांढुरना निवासी ज्योतिराम उईके 38, दीपक राउत 21 को पैर में गंभीर चोट आने के कारण नागपुर रेफर किया गया है.
क्या है गोटमार उत्सव?
पांढुर्ना और सावरगांव के बीच लगभग 300 साल से चली आ रही यह परंपरा एक अनोखे पथराव के लिए जानी जाती है. पीटीआई के अनुसार, मेले की शुरुआत देवी चंडिका की पूजा से होती है, जिसके बाद दोनों गांवों के लोग जाम नदी के किनारों पर आमने-सामने खड़े होकर पत्थर फेंकते हैं.
मान्यता के अनुसार, एक युवक ने सावरगांव की लड़की का अपहरण किया था, और उसे बचाने के लिए दोनों गांवों में संघर्ष हुआ. उत्सव के दौरान नदी के बीच लगे पेड़ पर झंडा छीनने की होड़ लगती है, जबकि दोनों ओर से पत्थरबाजी की जाती है.
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
कार्यक्रम स्थल पर धारा-144 लागू थी, पुलिस बल की भारी तैनाती और सीसीटीवी निगरानी के बावजूद पत्थरबाजी को रोकना संभव नहीं हो सका. कलेक्टर अजय देव शर्मा और एसपी सुंदर सिंह स्वयं मौके पर मौजूद रहे, परंतु भीड़ के आगे प्रशासन की सख्ती नाकाम रही.
इस साल पुलिस ने उत्सव की निगरानी ड्रोन कैमरों से की. गुलेल, हथियार और शराब के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई थी. 500 से ज्यादा पुलिसकर्मी और 10 एम्बुलेंस मौके पर तैनात की गईं. कई मेडिकल टीम भी पूरे समय सक्रिय रहीं.
फिर भी, 800 से ज्यादा लोग घायल हो गए. पुलिस अधीक्षक सुंदर सिंह कनेश ने बताया कि इस बार कोई समूह झंडा हासिल नहीं कर सका और समिति ने आपसी सहमति से कार्यक्रम समाप्त कर दिया.
परंपरा और विवाद
गोटमार मेला मध्य प्रदेश का एक ऐतिहासिक उत्सव माना जाता है, लेकिन हर साल यह हिंसा और चोटों के कारण चर्चा में रहता है. प्रशासन द्वारा सुरक्षा इंतजाम के बावजूद इस बार भी बड़ी संख्या में लोग घायल हुए. हालांकि, आयोजन बिना किसी गंभीर विवाद के संपन्न हुआ, लेकिन एक बार फिर इस परंपरा की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं. हाईन्यूज़!