तलाक के बाद दूसरी शादी कर ले बीवी तो भी पहले शौहर को देना पड़ेगा गुजारा भत्ता? गुहार लेकर SC पहुंचा मुस्लिम पति

क्या तलाक के बाद मुस्लिम महिला फैमिली कोर्ट में स्थायी गुजारा राशि (alimony) की मांग कर सकती है? अगर वह महिला दोबारा शादी कर लेती है, तो क्या गुजारा राशि बदली जा सकती है? इन अहम कानूनी सवालों पर सुप्रीम कोर्ट विचार करेगा. उसने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे को अपनी सहायता के लिए एमिकस क्यूरी नियुक्त किया है.

मामला गुजरात हाई कोर्ट से होता हुआ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है. हाई कोर्ट ने अहमदाबाद फैमिली कोर्ट के उस फैसले को सही ठहराया था, जिसमें तलाक के बाद तारीफ राशिदभाई कुरैशी को अपनी पूर्व पत्नी अस्मा बानू को 10 लाख रुपए की स्थायी गुजारा राशि देने को कहा गया था. 2019 में दिए इस फैसले में फैमिली कोर्ट ने पत्नी की याचिका को स्वीकार करते हुए 2009 में हुए निकाह को निरस्त करार दिया था. साथ ही एकमुश्त और स्थायी गुजारा राशि भी तय की थी.

हाई कोर्ट में पति की तरफ से दलील दी गई कि कानून मुस्लिम पत्नी को गुजारा भत्ते के लिए सिर्फ मजिस्ट्रेट के पास सीआरपीसी 125 का आवेदन दाखिल करने की अनुमति देता है. यह भुगतान भी पति को सिर्फ इद्दत की अवधि (3 महीने) के लिए करना होता है. पति ने मुस्लिम वुमेन (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑन डिवोर्स) एक्ट, 1986 के आधार पर ऐसा दावा किया था.

पति तारीफ राशिदभाई के वकीलों ने यह भी कहा कि अगर पत्नी किसी आमदनी के लिए सक्षम न हो, तो उसकी दोबारा शादी होने तक भी मासिक गुजारा राशि का प्रावधान है. ऐसे में फैमिली कोर्ट की तरफ से एकमुश्त गुजारा राशि तय कर देना गलत था. हाई कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज कर दिया.

2020 में दिए फैसले में हाई कोर्ट के तत्कालीन जज जस्टिस जे बी पारडीवाला (अब सुप्रीम कोर्ट के जज) ने कहा कि 1939 का मुस्लिम विवाह विच्छेद कानून मुस्लिम महिलाओं को शादी निरस्त करवाने के लिए सिविल कोर्ट जाने का अधिकार देता है. 1984 का फैमिली कोर्ट्स एक्ट कानूनी तरीके से रद्द विवाह के मामले में परिवार अदालत को स्थायी भरण-पोषण राशि तय करने की शक्ति देता है. ऐसे में फैमिली कोर्ट का आदेश कानूनन सही है. हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि पति को एकमुश्त गुजारा राशि का भुगतान एक ही बार में कर देना होता है. इसका महिला के बाद में दोबारा शादी करने या न करने से कोई संबंध नहीं है.

हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे पति की याचिका को सुनते हुए जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की बेंच ने 2 वरिष्ठ वकीलों को एमिकस क्यूरी नियुक्त कर दिया है. कोर्ट ने 15 अप्रैल को अगली सुनवाई की बात कहते हुए दोनों वरिष्ठ वकीलों से लिखित दलीलें जमा करने के लिए कहा है. हाईन्यूज़ !

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