Makar Sankranti 2024: कब है मकर संक्रांति 2024 ? जानें सही तारीख, स्नान मुहूर्त और क्या है दान महत्व

Makar Sankranti 2024 Date:HN/ जनवरी के महीने में मकर संक्रांति के त्योहार को बड़े ही उत्साह के साथ पूरे देश में अलग-अलग नाम से मनाया जाता है. इस दिन से सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण में आ जाते हैं. उत्तरायण को देवता का दिन कहा जाता है.

सूर्य के राशि बदलने के समय से ही संक्रांति मनाने निर्णय किया जाता है, इसलिए मकर संक्रांति की तारीख में बदलाव होता है, साल 2024 में भी मकर संक्रांति की तारीख को लेकर अगर कंफ्यूजन है तो यहां जानें इस पर्व की सही डेट, मुहूर्त.

मकर संक्रांति 2024 डेट (Makar Sankranti 2024 Kab Hai)

मकर संक्रांति 15 जनवरी 2024 को मनाई जाएंगी, क्योंकि इसी दिन सूर्य धनु राशि में अपनी यात्रा समाप्त कर प्रात: 02 बजकर 54 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे.

मकर संक्रान्ति पुण्य काल – सुबह 06.41- शाम 06.22

  • मकर संक्रान्ति महा पुण्य काल – सुबह 06.41 – सुबह 08.38

क्यों सभी संक्रांति में खास है मकर संक्रांति ? (Makar Sankranti Importance)

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्राति के दिन ही सूर्य देव अपने पुत्र शनि से मिलने उनके घर जाते हैं. यह पर्व पिता-पुत्र के अनोखे मिलन से भी जुड़ा है. पौराणिक कथा के अनुसार जब सूर्य देव पहली बार पत्नी छाया और उनके बेटे शनि से मिलने उनके घर आए थे तो शनि देव ने काले तिल से उनका स्वागत किया था.

सूर्य देव ने प्रसन्न होकर शनि देव को आशीर्वाद दिया कि जब भी मैं मकर राशि में प्रवेश करुंगा और जो लोग इस दिन मुझे काले तिल अर्पित करेंगे उनके जीवन में सुख-समृद्धि आएगी, उनका घर धन-धान्य से भर जाएगा. मकर शनि की राशि है, यही वजह है कि मकर संक्रांति बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है.

मकर संक्रांति पर तिल-गुड़ का महत्व (Makar Sankranti Til Gud Significance)

मकर संक्रांति एक ऋतु पर्व है, ये हेमंत और शीत ऋतु का संधिकाल है. मकर संक्रांति का त्योहार जनवरी में ठंड के मौसम में आता है, यही वजह है कि इस दौरान सूर्य की पूजा और खिचड़ी और तिल-गुड़ खाने की परंपरा बनाई गई ताकि बदलते मौसम का सेहत और जीवन पर नकारात्मक असर न पड़े. कहा जाता है कि इस दिन गुड़, तिल और बाजरे आदि का दान करने से भगवान सूर्यदेव प्रसन्न होते हैं.

  • धर्म शास्त्रों के अनुसार, तिल दान से शनि के कुप्रभाव कम होते हैं.
  • तिल के सेवन से, तिल मिश्रित जल से स्नान करने से, पापों से मुक्ति मिलती है और कष्टों से राहत मिलती है.
  • श्राद्ध और तर्पण में तिल का प्रयोग असुरी बाधाओं से छुटकारा दिलाता है. पितरों की आत्मा तृप्त रहती है.
  • Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि highnews.in किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

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