कहा जाता है कि प्रेम और मानवता का कोई धर्म नहीं होता, और इसी बात को सच कर दिखाया है मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले के एक मुस्लिम परिवार ने. यहां एक मुस्लिम पिता अपनी हिंदू बेटी का कन्यादान हिंदू रीति-रिवाजों के साथ करने जा रहे हैं. नफरत के दौर में सामाजिक सौहार्द की यह अनूठी मिसाल पूरे देश के लिए एक नजीर बन गई है.
राजगढ़ जिले में इन दिनों एक शादी का कार्ड लोगों के बीच कौतूहल और एक शादी का कार्ड लोगों के बीच यह कार्ड नंदिनी परमार और अंश परमार की शादी का है, लेकिन इस कार्ड की खास बात इसके निवेदक हैं. कार्ड पर निवेदक की जगह एक मुस्लिम परिवार का नाम लिखा है, जो इस बेटी का कन्यादान करने जा रहा है.
अब्दुल्ला खान ने निभाया ‘पिता’ का धर्म
करीब 12 साल पहले सड़क हादसे और बीमारी में अपने माता-पिता को खोने वाली नंदिनी को अब्दुल्ला खान के परिवार ने न सिर्फ अपनाया, बल्कि उसे अपनी बेटी की तरह पाला-पोसा. खान परिवार ने नंदिनी को अपनी परंपराओं और धर्म को मानने की पूरी आजादी दी और उसे ग्रेजुएट भी कराया.
अब्दुल्ला खान के परिवार ने नंदिनी को कभी धर्म बदलने के लिए मजबूर नहीं किया, बल्कि उसे पूरी स्वतंत्रता के साथ हिंदू परंपराओं के बीच पाला. इस परिवार ने नंदिनी को ग्रेजुएट भी कराया. पढ़ाई के दौरान ही नंदिनी की मुलाकात ग्वालियर निवासी अंश परमार से हुई, जिसके बाद दोनों परिवारों की सहमति से रिश्ता तय हुआ.
पंडितों के मंत्रोच्चार के बीच होंगे फेरे
4 अप्रैल को राजगढ़ में होने वाला यह विवाह पूरी तरह से हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार होगा. शहर के ओल्ड कलेक्ट्रेट रोड स्थित परिवार के निवास पर शाम 7 बजे से कार्यक्रम शुरू होगा. यहां मुस्लिम परिवार की मौजूदगी में पंडित मंत्रोच्चार करेंगे और पारंपरिक विधि-विधान से शादी की सभी रस्में निभाई जाएंगी. तो वहीं यह मुस्लिम परिवार के सदस्य भी महीनों से इस शादी की तैयारियों में जुटे हैं, ताकि अपनी लाडली को एक यादगार विदाई दे सकें.
जाहिर सी बात है मजहब और दीवारों से परे, यह कहानी हमें याद दिलाती है कि इंसानियत का रिश्ता सबसे बड़ा होता है. राजगढ़ का यह परिवार आज देश के सामने ‘सर्वधर्म समभाव’ की एक अद्भुत मिसाल पेश कर रहा है. हाईन्यूज़ !















