ईरान की जंग का असर तेहरान से लेकर असम तक, राज्य के चाय उद्योग पर आया संकट में; TAI सचिव ने दी चेतावनी

मिडिल ईस्ट जंग का असर तेहरान से लेकर असम तक देखने को मिल रहा है. चाय निर्यात व्यवस्था पर गहराता संकट एक चुनौती बन गया है. टी एसोसिएशन ऑफ इंडिया (असम शाखा) के सचिव दिपांजल डेका ने मीडिया से बातचीत के दौरान अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के चाय व्यापार पर पड़ रहे असर को लेकर गंभीर चेतावनी दी. वह जोरहाट में आयोजित 37वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में शामिल होने आए थे.

मीडिया को संबोधित करते हुए डेका ने कहा कि मौजूदा वैश्विक संकट जिसे उन्होंने युद्ध जैसी स्थिति बताया, अब व्यापार मार्गों और लॉजिस्टिक्स को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है. उन्होंने कहा, ‘युद्ध का असर हमारे कारखानों में कई दिनों से महसूस किया जा रहा है.’

दुबई हब और निर्यात श्रृंखला पर खतरा

डेका ने असम चाय के लिए दुबई की अहम भूमिका को रेखांकित किया. उन्होंने बताया कि असम की बड़ी मात्रा में चाय दुबई के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों जैसे सिंगापुर और ईरान तक पहुंचती है.

उन्होंने कहा, ‘ईरान अकेले करीब 1.15 करोड़ किलोग्राम चाय आयात करता है, जबकि लगभग 5 करोड़ किलोग्राम चाय दुबई के रास्ते जाती है. वहां से यह अन्य देशों में पुनः निर्यात होती है। अगर यह श्रृंखला बाधित होती है, तो हमारे निर्यात पर गंभीर असर पड़ेगा.’

साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि इन व्यापार मार्गों में लंबे समय तक बाधा रहने से असम के चाय उद्योग को बड़ा झटका लग सकता है.

निर्यात में बढ़ोतरी पर संकट की मार

डेका ने बताया कि पिछले साल चाय निर्यात में उल्लेखनीय सुधार देखा गया था. उन्होंने कहा कि लंबे समय की स्थिरता के बाद निर्यात करीब 280 मिलियन किलोग्राम तक पहुंच गया था, जो सामान्य 220–240 मिलियन किलोग्राम से काफी अधिक है. लेकिन वर्तमान भू-राजनीतिक तनाव इस प्रगति को पलट सकता है.

उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय शिपिंग बीमा एक बड़ी समस्या बन गई है. डेका ने कहा कि ऐसे संघर्ष के समय बीमा मिलना मुश्किल हो जाता है, जिससे प्रभावित क्षेत्रों में चाय भेजना लगभग असंभव हो जाता है. इसके चलते उद्योग के पास अब 5 करोड़ किलोग्राम से अधिक चाय का अतिरिक्त भंडार जमा हो गया है, जो अपने बाजार तक नहीं पहुंच पा रहा है.

उद्योग स्तर पर व्यापक चर्चा
करीब दो साल के अंतराल के बाद आयोजित इस 37वीं AGM में चाय उद्योग से जुड़े विभिन्न हितधारकों खरीदारों, ब्रोकरों, गोदाम संचालकों और शोध संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया. इसमें असम टी प्लांटर्स एसोसिएशन, टी बोर्ड ऑफ इंडिया सहित कई संगठनों के सदस्य शामिल हुए. शोधकर्ताओं और अकादमिक विशेषज्ञों ने भी उद्योग की चुनौतियों और संभावित समाधानों पर अपने विचार साझा किए. डेका ने कहा कि यह बैठक निर्यात संकट से लेकर दीर्घकालिक स्थिरता और शोध पहल तक सभी साझा मुद्दों पर चर्चा का मंच बनी.

सामाजिक और श्रमिक मुद्दों पर भी फोकस

बैठक में चाय उद्योग से जुड़े सामाजिक पहलुओं पर भी चर्चा हुई. विशेष रूप से चाय बागानों में काम करने वाली महिला श्रमिकों की स्थिति सुधारने के लिए स्वयं सहायता समूहों और गैर-सरकारी संगठनों के साथ सहयोग पर जोर दिया गया.  डेका ने बताया कि हम जमीनी स्तर पर काम करने वाले संगठनों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ रहे हैं, खासकर उन मुद्दों पर जो महिला श्रमिकों को प्रभावित करते हैं.

आगे का रास्ता अनिश्चित

निर्यात चैनलों में बाधा और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच उद्योग जगत ने आने वाले महीनों को लेकर चिंता जताई है. भारत के कृषि निर्यात में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला असम का चाय उद्योग अब लॉजिस्टिक्स, आर्थिक और भू-राजनीतिक चुनौतियों से जूझ रहा है. डेका ने अंत में कहा कि अगर यह स्थिति जारी रही, तो हमारे निर्यात पर गहरा असर पड़ेगा, जो पूरे उद्योग के लिए चिंताजनक है. इससे निपटने के लिए सभी हितधारकों और सरकार के बीच समन्वय जरूरी है. हाईन्यूज़ !

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