विदाई भाषण में दिग्विजय सिंह ने बताया अपना ‘फ्यूचर प्लान’, अटल बिहारी वाजपेयी का जिक्र कर दिए ये संकेत

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेता और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह आज सदन से सेवानिवृत्त हो गए. अपने विदाई भाषण में उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्रियों इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी का जिक्र करते हुए सभी से सद्भाव की अपील की. इस दौरान उन्होंने इशारों में अपना फ्यूचर प्लान भी बताया.

उन्होंने कहा कि – मुझे अटल बिहारी वाजपेयी की वह बात याद आती है-‘मैं न थका हूं, न सेवानिवृत्त हुआ हूं.(न मैं टायर्ड हूं, न रिटायर्ड हूं)’ आगे चल कर हम और भी काम करेंगे.

माना जा रहा है कि दिग्विजय सिंह अब मध्य प्रदेश में वर्ष 2028 के विधानसभा चुनावों के लिए अभी से पार्टी के लिए मेहनत करेंगे. उनके बेटे जयवर्धन सिंह राघोगढ़ विधानसभा क्षेत्र से विधायक भी हैं.

मैंने हमेशा विचारधारा के मार्ग पर चलने का प्रयास किया-दिग्विजय सिंह

इससे पहले दिग्विजय सिंह ने कहा कि लोगों को इस बात का आश्चर्य होगा कि मेरे छात्र जीवन में मेरा राजनीति से कभी कोई संपर्क या समर्थन नहीं रहा. परिस्थितियाँ कुछ ऐसी बनीं कि मैं 22 वर्ष की आयु में नगर पालिका अध्यक्ष बन गया. सर्वसम्मति से 30 वर्ष की आयु में विधायक चुना गया, 33 वर्ष की आयु में राज्य का मंत्री बना, सांसद बना और 40 वर्ष की आयु में मुख्यमंत्री बन गया.

कांग्रेस नेता ने कहा कि लेकिन मैंने हमेशा अपनी विचारधारा के मार्ग पर चलने का प्रयास किया है. मैंने अपनी विचारधारा के साथ कभी समझौता नहीं किया. अपने राजनीतिक जीवन में मैंने किसी के प्रति कटुता नहीं पाली. मतभेद होते रहे, और विचारधारा में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन मनभेद होने का अवसर मैंने कभी नहीं दिया.

मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम ने कहा कि आज भी मैं आपसे यही अनुरोध करना चाहता हूं. हो सकता है कि मेरे भाषण में कई बार कुछ कटुता आ गई हो और किसी को बुरा लगा हो, उसके लिए मैं क्षमा प्रार्थी हूं. लेकिन मैं आपको यह अवश्य विश्वास दिलाना चाहता हूं कि चाहे मध्य प्रदेश विधानसभा हो, लोकसभा हो या यह सदन-मेरे संबंध उन लोगों के साथ भी हमेशा अच्छे रहे हैं, जिनकी विचारधारा से मैं सहमत नहीं था, न हूं और न ही कभी रहूंगा. जहां तक हमारे कॉमरेड्स का प्रश्न है, कार्य संचालन को लेकर कुछ मतभेद हो सकते हैं, लेकिन गरीबों के पक्ष में उनकी जो विचारधारा रही है, उसका मैंने हमेशा समर्थन किया है.

मैं व्यवधानों के पक्ष में कभी नहीं रहा- दिग्विजय सिंह

उन्होंने कहा कि मेरा यह सौभाग्य रहा है कि मैं उस लोकसभा का सदस्य रहा, जिसमें अटल बिहार वाजपेयी (तत्कालीन प्रधानमंत्री) और राजीव गांधी (तत्कालीन प्रधानमंत्री) जैसे नेता रहे. इंदिरा गांधी (तत्कालीन प्रधानमंत्री) ने मुझे कांग्रेस में प्रवेश दिलाया और चंद्रशेखर (तत्कालीन प्रधानमंत्री) भी उस समय संसद में थे. इन सभी महान नेताओं से प्रभावित होकर ही मैंने अपना राजनीतिक सफर तय किया है. मैं सदन में होने वाले व्यवधानों के पक्ष में कभी नहीं रहा. लोकतंत्र की बुनियाद चर्चा है, और सदन में यह सत्ता पक्ष की जिम्मेदारी होती है कि वह विपक्ष के साथ संवाद करके कोई समाधान निकाले.

दिग्विजय सिंह ने कहा कि इस सदन में अंसारी साहब (पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी) अध्यक्ष रहे हैं. उन्होंने कभी भी बिना पर्याप्त चर्चा के किसी बिल को पारित होने का अवसर नहीं दिया. रास्ता हमेशा संवाद से निकलता है, निकल सकता है और निकलना चाहिए. यही लोकतंत्र की मूल भावना है, जिसमें आज कुछ कमी दिखाई देती है.

‘मैं कांग्रेस पार्टी का आभारी हूं कि…’

सांसद ने कहा कि मैं आपसे यह भी कहना चाहता हूं कि आज देश में जिस प्रकार से सांप्रदायिक कटुता और मनमुटाव बढ़ रहा है, वह देश के लिए उचित नहीं है. यह न हमारे संस्कारों और संस्कृति के अनुरूप है, न लोकतंत्र के लिए और न ही भारतीय संविधान की भावना के अनुकूल है. मैंने अपने राजनीतिक जीवन में अपना मार्ग स्वयं तय किया है और इसके लिए मैं कांग्रेस पार्टी का आभारी हूं, जिसने मुझे हर सदन में सेवा करने का अवसर दिया.

उन्होंने कहा कि आज इस अवसर पर मैं उन सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त करता हूं, जिन्होंने मेरे बारे में अच्छे शब्द कहे. मैं यह विश्वास दिलाता हूं कि अपने राजनीतिक जीवन में मैं उसी भावना के साथ कार्य करता रहूंगा, जैसा कबीर ने कहा है- ‘कबीरा खड़ा बाज़ार में, सबकी मांगे खैर, ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर.’ हाईन्यूज़ !

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