एक फेल तो सब फेल, टीम इंडिया को बस इस सोच से बाहर निकलना होगा

बुद्धवार को भारतीय टीम श्रीलंका के खिलाफ दूसरा वनडे मैच खेलने के लिए मैदान में उतरेगी. ये मैच मोहाली में खेला जाएगा. धर्मशाला में बुरी तरह से हारने के बाद टीम इंडिया को इस मैच में जीत-हार से पहले अपनी ताकत दिखानी है. ताकत दिखाने का आशय ये है कि टीम इंडिया को दिखाना है कि धर्मशाला उन बेहद चुनिंदा मैचों में से एक था जहां भारतीय टीम ‘कलेक्टिव फेल्योर’ यानी सामूहिक विफलता का शिकार हुई. इस बात को कोई झुठला नहीं सकता कि भारतीय टीम अब उस दौर से काफी आगे निकल चुकी है जहां एक दो विकेट जल्दी गिरने के बाद पूरी टीम लड़खड़ा जाती थी. पिछले लंबे समय से टीम इंडिया को झटकों से उबरना आता है. टॉप ऑर्डर नहीं चला तो मिडिल ऑर्डर अपनी जिम्मेदारी निभाता है. मिडिल ऑर्डर नहीं चला तो निचले क्रम के बल्लेबाज अपना रोल निभाते हैं.

गेंदबाजी में भी यही परंपरा चल रही है. धर्मशाला की हार आंखे खोलने वाली इसीलिए थी क्योंकि उस रोज कुछ भी नहीं चला. ना बल्लेबाजी, ना गेंदबाजी. कहने के लिए ये वजह भी गिनाई जा सकती है कि कप्तान विराट कोहली की गैरमौजूदगी टीम इंडिया को भारी पड़ी लेकिन सच ये है कि हाल के दिनों में टीम इंडिया के बल्लेबाजों ने साबित किया है वो विराट कोहली के बिना भी जीतना जानते हैं इसलिए ये हार की तमाम वजहों में से एक छोटी सी वजह हो सकती है, बस…इससे ज्यादा कुछ नहीं.

टीम इंडिया का पिछले एक साल का रिकॉर्ड देखिए
सिर्फ एक आंकलन के लिए बीते एक साल के मैच रिकॉर्ड देखिए. जनवरी 2017 से लेकर अब तक खेले गए 25 मैच ले लेते हैं. इन 25 मैचों में टीम इंडिया ने 17 मैच जीते हैं. जाहिर है आप उसके प्रदर्शन का अंदाजा लगा सकते हैं. इन 25 मैचों में 7 बार टीम इंडिया ने 300 से ज्यादा का स्कोर बनाया है. सिर्फ पांच मैच ऐसे हैं जब भारतीय टीम 200 रनों के आंकड़े को पार नहीं कर पाई. इसमें से सबसे कम 112 रन का स्कोर भारत ने धर्मशाला में पिछले मैच में श्रीलंका के खिलाफ बनाया. ऐसे 5 मैचों में जब टीम इंडिया 200 रन भी नहीं बना पाई उसे 3 मैचों में हार का सामना करना पड़ा. 1 मैच का नतीजा नहीं निकला. एक मैच टीम इंडिया ने जीता. इन आंकड़ों को बताने का मकसद सिर्फ इतना था कि इस बात को साबित किया जा सके कि टीम इंडिया ‘तू चल-मैं आया’ की स्थिति से बाहर आ चुकी है.

रोहित शर्मा को रखनी होगी मिसाल
विराट कोहली की गैरमौजूदगी में रोहित शर्मा टीम इंडिया की कप्तानी कर रहे हैं. पिछले मैच में उनका बल्ला नहीं चला. स्कोरबोर्ड पर इतने कम रन जुड़े थे कि कप्तानी में उनके पास ज्यादा कुछ करने के लिए था नहीं. बावजूद इसके जो थोड़ा बहुत दबाव वो अपनी रणनीतियों से बना सकते थे, उसमें वो चूक गए. उन्होंने कुलदीप यादव और यजुवेंद्र चहल से एक भी ओवर नहीं डलवाया. श्रीलंका की टीम ने मैच जीतने के लिए करीब 21 ओवर बल्लेबाजी की और ये पूरे 21 ओवर भारतीय टीम के तेज गेंदबाजों ने फेंके. हार्दिक पांड्या काफी महंगे साबित हो रहे थे. वो लगभग 8 रन प्रति ओवर खर्च कर रहे थे. फिर भी रोहित शर्मा ने उन्हें हटाने की नहीं सोची. ये बहुत हद तक संभव है कि धर्मशाला ठंढी जगह है और वहां की पिच से स्पिन गेंदबाजों को मदद ना के बराबर मिलती, लेकिन कई बार विरोधी टीम को चौंकाने के लिए प्रयोग किए जाते हैं. रोहित शर्मा ने ऐसा कोई प्रयोग नहीं किया. रोहित शर्मा शानदार खिलाड़ी हैं. उनकी आलोचना इसलिए भी नहीं होनी चाहिए क्योंकि सिर्फ एक मैच के नतीजे के आधार पर कोई बड़ी राय नहीं बनानी चाहिए. वो आईपीएल में मुंबई इंडियंस को चैंपियन बनाकर अपनी कप्तानी की काबिलियत साबित कर चुके हैं. उन्हें सिर्फ इस बात की मिसाल कायम करनी है कि वो खिलाड़ियों को ये समझाएं कि उन्हें एक के बाद एक नाकाम होने की बजाए, खुद पर भरोसा रखकर अकेले लड़ाई लड़ने की सोच के साथ मैदान में उतरना है. श्रीलंका को बुद्धवार को एक बदली हुई टीम इंडिया दिखनी चाहिए.

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