मोबाइल टॉर्च की रोशनी में हुआ था गैंगरेप, आरोपी पीड़िता से कह रहे थे कई बातें

भोपाल। 31 अक्टूबर की शाम को राजधानी में हुए गैंगरेप के मामले में कोर्ट में पेश किए गए चालान में नए खुलासे ने चौंका दिया है। चारों आरोपियों ने छात्रा का मोबाइल छीनकर उसकी टार्च की रोशनी में ही गैंगरेप किया था। इसके बाद वह छात्रा की सोने की बालियां, घड़ी और माेबाइल छीना। इसके बाद मार डालने के लिए छात्रा को मुक्कों से मारा, गला दबाया और मरा हुआ समझकर छोड़कर भाग गए। गुरुवार को जीआरपी द्वारा कोर्ट में पेश किए गए चालान में यह खुलासा हुआ।

चारों आरोपियों ने छात्रा को झाड़ियों में ले जाने के बाद बारी-बारी से गैंगरेप किया। उन्होंने छात्रा के हाथ पीछे से बांध दिए, अंधेरा होने पर उन्होंने छात्रा का मोबाइल उसकी जेब से निकाला। एक आरोपी ने माेबाइल टार्च जलाई और दूसरे दुष्कर्म किया। ऐसा बारी-बारी से चारों आरोपियों ने किया। इसके बाद वह चर्चा करते रहे कि इसे छोड़ना ठीक नहीं है।

दरिंदगी के बाद आरोपियों ने पूछा- गोल्ड है क्या…

छात्रा से दरिंदगी करने के बाद आरोपियों ने उससे पूछा था कि तुम्हारे पास गोल्ड है क्या? तब पीड़िता ने कान की बालियां बताई। चारों बोले कि तुम्हारे पास जो भी सामान है, दे दो, नहीं तो हम खींच लेंगे। पीडि़ता ने कहा मैं निकालकर देती हूं। तब दरिंदों ने पीड़िता के हाथ खोल दिए।

छात्रा ने बालियां, मोबाइल फोन और घड़ी उतारकर उनको दे दी। इसके बाद चारों आपस में बात करने लगे कि इसे मार डालते हैं। इसके बाद उन्होंने छात्रा को मुक्कों से मारा, गला दबाया और मरा हुआ समझकर छोड़ गए।

जीआरपी द्वारा गैंगरेप मामले में पेश चालान में किया गया। वहीं मामले के चारों आरोपियों को शुक्रवार को जेल से अदालत में पेश किया जाएगा।

मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश हुआ चालान

मजिस्ट्रेट शालू सिरोही की कोर्ट में चालान पेश किया गया। इस मामले में रिमांड तारीख न होने से जेल से आरोपियों को पेश नहीं किया गया था। जिस समय चालान पेश हुआ, उस समय अदालत में एक मामले में गवाही चल रही थी। मजिस्ट्रेट ने गवाही के बाद कहा कि जो लोग इस मामले से जुड़े है वे ही कोर्ट रूम में रुकें। इसके बाद अन्य मामलों में कोर्ट रूम में मौजूद पक्षकारों और वकीलों को कोर्ट रूम के बाहर जाने को कहा गया।

निलंबित टीआई और डाॅ. खुशबू भी गवाह सूची में

मामले में लापरवाही बरतने पर निलंबित किए गए थाना जीआरपी हबीबगंज में पदस्थ रहे टीआई मोहित सक्सेना और छात्रा की गलत मेडिकल रिपोर्ट जारी करने वाली खुशबू गजभिए को भी बतौर गवाह पेश किया गया है। इस मामले में खुशबू और एक अन्य डाॅक्टर को निलंबित कर दिया गया है।

हाईकोर्ट ने कहा था ‘ट्रैजिडी ऑफ एरर्स’

भोपाल गैंगरेप पर जबलपुर हाईकोर्ट ने 13 नवंबर को सुओ मोटो (स्वत: संज्ञान) लेते हुए सरकार को फटकार लगाई। पुलिस और डॉक्टर्स के रवैये को लापरवाही भरा बताते हुए हाईकोर्ट ने इसे ‘ट्रैजिडी ऑफ एरर्स’ (Tragedy of Errors) बताया था। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने सरकार से दो हफ्ते में एक्शन टेकन रिपोर्ट पेश करने का ऑर्डर दिया।

बता दें कि गैंगरेप के बाद विक्टिम को केस दर्ज कराने के लिए 24 घंटे तक बाद भटकना पड़ा था। खबर मीडिया में आई तो पुलिस ने एफआईआर दर्ज की। इसके बाद जब विक्टिम का सुल्तानिया लेडी हॉस्पिटल में मेडिकल कराया गया तो उसकी रिपोर्ट भी गलत दे दी गई।

पहली मेडिकल रिपोर्ट में कहा गया कि विक्टिम ने सहमति से संबंध बनाए। मीडिया में रिपोर्ट लीक हो गई तो अगले दिन दूसरी रिपोर्ट तैयार की गई। इसमें कहा गया कि विक्टिम गैंगरेप का शिकार हुई।

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