Cold War के बाद, सबसे खराब दौर में पहुचे अमेरिका-रूस के रिश्ते, जानें क्या है पूरा मामला

वॉशिंगटन/मास्को: अमेरिका में रूस के राजदूत एंटोली एंटोनोव ने एक बातचीत के दौरान कहा है कि कोल्ड वॉर के बाद से रूस और अमेरिका के रिश्ते अपने सबसे ख़राब दौर में हैं. ब्रिटेन में रूस के डबल एजेंट पर हुए नर्व गैस के कथित इस्तेमाल के बाद से यूरोप के कई देश और अमेरिका रूस के खिलाफ हो गए. इन देशों ने अपने यहां से दर्जनों राजनयिकों को निकाल बाहर किया. इसी सिलसिले में एंटोनोव ने कहा कि रूस और अमेरिका के रिश्ते इस कदर बिगड़ गए है कि अमेरिका में खराब मौसम के लिए भी रूस को जिम्मेदार बताया जाता है.

इसी सिलसिले में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने अमेरिका और रूस के बीच तनाव को शीतयुद्ध की याद दिलाने वाला दौर बताया है. उन्होंने आगे कहा वो इस बात से बेहद चिंतित हैं. अमेरिका से निकाले गए 60 लोगों में से 12 संयुक्त राष्ट्र में रूसी मिशन के खुफिया अधिकारी शामिल थे. उनपर अमेरिका में मिले आवास को दुरुपयोग करने का आरोप है.

गुतारेस ने संयुक्त राष्ट्र में रूसी राजनयिकों को अमेरिका से निकाले जाने और नए दौर के शीतयुद्ध की शुरूआत होने की आशंका के बारे में पूछे जाने पर कहा, “मैं वाकई बेहद चिंतित हूं. मेरा मानना है कि हम बहुत हद तक उसी तरह की स्थिति की ओर आ रहे हैं, जैसा शीत युद्ध के दौर में हमने देखा है.”

अबतक का घटनाक्रम

रूस ने कथित तौर पर जिस जासूस को मरवाने की योजना बनाई थी वो एक अघोषित रूसी जासूस था. इस मामले पर ब्रिटेन के अधिकारी जोनाथन एलेन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कहा था कि इन हथियारों को युद्ध में इस्तेमाल करने पर भी बैन लगा हुआ है. संयुक्त राष्ट्र में रूसी राजनयिक वेस्ली नेबेनज़ियाने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया और उल्टा ब्रिटेन को पुख्ता सबूत पेश करने को कहा है.

इस मामले में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप, फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रों, जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल का ब्रिटेन को पहले से सर्मथन हासिल है. संयुक्त बयान में इन्होंने कहा था, “दूसरे विश्व यूद्ध के बाद यूरोप में नर्व एजेंट के इस्तेमाल का यह पहला मामला है.” इन नेताओं ने आगे कहा था, “यह ब्रिटेन की संप्रभुता पर हमला है और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है.” बताते चलें कि वियना संधि के मुताबिक, इस तरह के रासायनिक हथियार के इस्तेमाल को बैन कर दिया गया है.

कैसे शुरू हुआ ये सब

घटना की शुरुआत मार्च 2018 में इंग्लैंड के सैलिसबरी में डबल मर्डर की एक कोशिश के बाद हुई. रूस के डबल एजेंट सर्गेई स्क्रिपल और उनकी बेटी को मारने के लिए नर्व गैस यानी एक तरह के घातक ज़हर का इस्तेमाल किया गया. इसका इस्तेमाल दूसरे विश्व युद्ध के बाद से बैन है. इग्लैंड ने इसका आरोप रूस पर लगाया और इसे अपनी संप्रभुता पर हमला बताया जिसके बाद यूरोप के उसके सहियोग देश समेत अमेरिका ने इसकी निंदा की. रूस ने इन आरोपों को सिरे से नकारा दिया है.

अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी समेत 26 देशों ने इस घटना के बाद 150 रूसी राजनयिकों को निकाल बहार किया जिसके जवाब में रूस ने भी ऐसे ही कदम उठाए. आपको बता दें कि साल 2016 में अमेरिकी चुनाव में हस्ताक्षेप करने के मामले में ओबामा प्रशासन ने भी 26 रूसी राजनयिकों को निकाल बाहर किया था. इसके बाद हाल ही में अमेरिका ने 13 रूसी नागरिकों पर अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में हस्ताक्षेप करने के आरोप लगाए जिसके जवाब में रूस का कहना था कि ये अमेरिका का गैर-जिम्मेदाराना बर्ताव  है.

फीफा विश्व कप से दूर रहेगा ब्रिटेन 

आपको बता दें कि साल के आखिर में रूस में फीफा विश्व कप होना है. इस आयोजन में शामिल होने के लिए रूस ने ब्रिटेन की पीएम थेरेसा मे को निमंत्रण भी भेजा था मगर उन्होंने इस विश्व कप के आयोजन में शरीक होने से मना कर दिया है. साथ ही उन्होंने कहा, “शाही परिवार का भी कोई सदस्य इस आयोजन में नहीं शरीक होगा.”

loading...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *