भारत भी सीख रहा है इजराइल से ये 10 बातें, पीएम मोदी भी कई बार कर चुके हैं तारीफें

नई दिल्ली: भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई बार सर्वजनिक मंचों से इजराइल की तारीफें कर चुके हैं. भारत, इजराइल के साथ रक्षा सौदे भी कर रहा है और उसके विशेषज्ञ सैनिक हमारे सैनिकों को नई बातें भी ट्रेनिंग दे रहे हैं. बहुत से देश इजराइल को पसंद नहीं करते लेकिन वे फिर भी इसका कुछ नहीं बिगाड़ पाते क्योंकि इसकी फौज काफी ताकतवर है. आइए जानते हैं कि आखिर ऐसा क्या है जो इस देश को खास और ताकतवर बनाता है.

1. 14 मई 1948 को आस्तित्व में आया था इजराइल. भारत से इजराइल की दूरी करीब 9 हजार किलोमीटर है. उसके पड़ोसी देश उस पर हमला करने की फिराक में रहते हैं. आतंकवादियों की नजरें उस पर हमेशा रहती हैं. लेकिन इजराइल ने सोच लिया है कि अगर खुद को बचाना है तो गोली भी चलानी होगी और आतंकवाद को जड़ से उखाड़ फेंकना होगा.

2. आतंकवाद से बचने के लिए इजराइल ने कभी किसी देश पर सीधा हमला बोला तो कभी मोसाद की मदद से दुश्मन देशों में ही घुस कर आतंकियों को निशाना बनाया. अपने देश के लोगों खासकर यहूदियों की रक्षा के लिए इसने कई ऐसे कारनामे किए हैं जिनकी हमेशा चर्चा होती रहती है.

3. एक आत्मघाती हमले के बाद इजराइल ने जॉर्डन के एक गांव पर हमला कर दिया था. इजराइल ने सोच लिया था कि इस गांव को पूरी तरह से तहस नहस कर देना है. गांव का कसूर केवल इतना था कि आत्मघाती हमलावर यहीं का रहने वाला था. माना जाता है कि इसमें 50 से 70 लोग मारे गए थे. इस घटना के बाद पूरी दुनिया ने इजराइल की निंदा की लेकिन यहां के राष्ट्रप्रमुख ने ऑपरेशन के कमांडर से कहा कि दुनिया चाहे जो कहे लेकिन हमें अगर अपनी धरती पर टिके रहना है तो हमें ऐसे ही लड़ना होगा.

4. काउंटर टेररिज्म स्ट्रेटजी कुछ ऐसी है कि इजराइल के तेल अवीव शहर में ना तो पुलिस दिखती है और ना ही नागरिकों में कोई खौफ ही दिखाई देता है. बावजूद इसके कि यहां अक्सर आतंकी हमले होते रहते हैं. एबीपी न्यूज़ जब यहां पहुंचा तो पता चला कि हर सेकेंड सीसीटीवी के जरिए हर गतिविधि पर नजर रखी जाती है. जैसे ही कोई संदिग्ध गतिविधि इन्हें नजर आती है ये लोग फौरन उस जगह पर पहुंच जाते हैं.

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5. आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस से सीसीटीवी जोडे हुए हैं जैसे ही AI कुछ संदिग्ध हरकत पकड़ता है वैसे ही संबंधित विभाग हरकत में आ जाते हैं. यहां के कंट्रोल सेंटर में सभी महत्वपूर्ण विभागों के लोग एक साथ बैठते हैं और आपातकाल की स्थिति में तुरंत फैसले ले पाते हैं. इसी वजह से राहत, एक्शन, पुलिस, प्रशासन, अस्पताल सभी एक साथ हरकत में आ जाते हैं.

6. फलीस्तीन से आने वाली हर गाड़ी को एक खास तरीके से चेक किया जाता है. एक अनुमान के मुताबिक अमेरिका 12 खरब रुपये खर्च करने के बाद इस तकनीक तक पहुंच पाया है. इसकी बदौलत इजराइल ने आतंकी हमलो को संख्या बेहद घटा दी है. जो बाड़ सीमा पर लगाई गई है उसमें एक बेहद खास तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. अगर कोई बाड़ के साथ छेड़छाड़ करता है तो एक मैसेज फौज तक पहुंच जाता है.

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7. इजराइल के नागरिक अगर अगवा हो जाते हैं तो वो अपहरणकर्ताओं के साथ किसी भी रूप में बात नहीं करता है यानि उसके पास कमांडो कार्रवाई के अलावा कोई चारा नहीं बचता है. इन कमांडोज के पास जो तकनीक होती है वह वाकई कमाल की है. साथ ही इनके हथियार भी लाजवाब होते हैं. इसी वजह से ये लोग अपने नागरिकों को बचा पाते हैं.

8. जो विदेशी लोग यहां आते हैं उनके साथ लंबी बातचीत की जाती है और ये समझने का प्रयास किया जाता है कि आखिर ये लोग क्यों इजराइल की जमीन पर आना चाहते हैं. शायद यही कारण है कि एक बार के बाद यहां कभी कोई हाईजैकिंग नहीं हो पाई.

9. खास तरह के ऑपरेशन्स को अंजाम देने के लिए इनके पास खास बंदूकें भी हैं जिनकी नली आराम से मुड़ सकती हैं. इनमें कैमरा भी लगा होता है और लाइट व लेजर भी. दीवार के पीछे छुपा सैनिक इसे आराम से चला पाता है और इस तरह सैनिक अपनी जान बचा सकता है और आतंकियों को आराम से मार सकता है.

10. इजराइल का अवाक्स सिस्टम यानि हवा में खतरे का पता लगाने और कंट्रोल करने वाला सिस्टम भी बेहद मजबूत है. पिछले दिनों भारत को भी इजराइल ने ऐसी मदद दी है. हालांकि इसके लिए भारत को भारी कीमत भी चुकानी पड़ी है.

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